नई दिल्ली। भारत ने अपने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए स्वदेशी पाँचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट – एएमसीए) के विकास को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए प्रोटोटाइप निर्माण चरण की दिशा में अहम निर्णय लेते हुए निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी औपचारिक रूप से शामिल किया है।
सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने एएमसीए परियोजना के लिए तीन प्रमुख भारतीय निजी क्षेत्र की संयुक्त कंपनियों को प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टुब्रो–भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (एलएंडटी–बीईएल) गठबंधन तथा भारत फोर्ज–बीईएमएल समूह शामिल हैं। ये कंपनियाँ अब इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान के प्रोटोटाइप निर्माण की दौड़ में भाग लेंगी।
यह परियोजना भारत के वायुसेना बेड़े को आधुनिक बनाने और भविष्य की हवाई चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है। एएमसीए को पूरी तरह स्टील्थ तकनीक, उन्नत एवियोनिक्स, और उच्च गतिशीलता क्षमता से लैस करने की योजना है, जिससे यह दुश्मन के रडार से बचकर गहरे हमले करने में सक्षम होगा।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान अपनी हवाई क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहे हैं। खासकर चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा और पाकिस्तान को मिल रहे आधुनिक लड़ाकू विमानों की पृष्ठभूमि में भारत का यह स्वदेशी प्रयास रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एएमसीए परियोजना का उद्देश्य केवल एक विमान विकसित करना नहीं है, बल्कि भारत को उन्नत लड़ाकू विमान निर्माण की तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसके तहत आने वाले वर्षों में कई प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे, जिनके सफल परीक्षण के बाद इसका उत्पादन चरण शुरू होगा।
यह कदम भारतीय रक्षा निर्माण क्षेत्र में निजी उद्योगों की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है, जिससे भविष्य में देश की एयरोस्पेस क्षमता और अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है।













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