नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के आधुनिकीकरण के लिए “सार्थक-पीडीएस” योजना की घोषणा की है। इस योजना पर कुल 25,530 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य पीडीएस व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है, साथ ही लॉजिस्टिक्स सुधार और लाभार्थी प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग बढ़ाना है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान इस योजना की जानकारी दी। योजना की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक पांच वर्षों के लिए निर्धारित की गई है।
सरकार के अनुसार इस योजना में राज्यों की एजेंसियों को खाद्यान्न के अंतर-राज्यीय परिवहन के लिए सहायता दी जाएगी, उचित मूल्य की दुकानों (फेयर प्राइस शॉप्स) को सशक्त किया जाएगा और पूरी पीडीएस प्रणाली का आधुनिकीकरण किया जाएगा।
स्मार्ट पीडीएस के अगले चरण के तहत तीन प्रमुख एआई आधारित मॉड्यूल भी शुरू किए गए हैं— NIRMAL, ASHA और SAKSHAM।
- NIRMAL प्लेटफॉर्म एक एआई आधारित रियल-टाइम लाभार्थी रजिस्ट्री प्रणाली होगी, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों के बीच डेटा एकीकरण और योजनाओं का समन्वय किया जाएगा।
- ASHA मॉड्यूल एक बहुभाषी एआई शिकायत एवं नागरिक संवाद प्लेटफॉर्म होगा, जो कॉल, व्हाट्सऐप, आईवीआरएस और चैटबॉट के माध्यम से काम करेगा। सरकार के अनुसार यह प्रतिदिन लगभग तीन लाख इंटरैक्शन संभालने में सक्षम होगा।
- SAKSHAM प्लेटफॉर्म आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को एआई आधारित बनाएगा, जिसमें वाहन ट्रैकिंग, क्यूआर ट्रेसबिलिटी, मांग पूर्वानुमान और रूट ऑप्टिमाइजेशन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
सरकार ने बताया कि इस तकनीकी व्यवस्था से पात्र लाभार्थियों की पहचान अधिक सटीक होगी और नागरिकों की संतुष्टि में वृद्धि होगी। कैबिनेट ब्रीफिंग में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार ASHA एआई प्रणाली नागरिकों को उनकी पसंदीदा भाषा में तेज शिकायत निवारण की सुविधा देगी।
इसके अलावा, इस योजना से खाद्यान्न परिवहन दूरी में 15 से 50 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है, जिससे खाद्यान्न की बचत और स्थानीय खरीद को बढ़ावा मिलेगा। लॉजिस्टिक्स सुधार से हर साल लगभग 280 करोड़ रुपये की बचत और 35 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान है।
सरकार ने यह भी बताया कि पूरी आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए खाद्यान्न बोरियों पर क्यूआर कोड टैगिंग और वाहनों की लोकेशन ट्रैकिंग प्रणाली लागू की जाएगी।
केंद्र सरकार का कहना है कि यह पहल पीडीएस को अधिक कुशल, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे वितरण प्रणाली में सुधार और लीकेज में कमी आने की उम्मीद है।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत