डेस्क : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में किसी भी प्रकार के “दोहरे मापदंड” को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद चाहे किसी भी रूप में हो, किसी भी देश में हो या किसी भी उद्देश्य से किया गया हो, उसके खिलाफ एक समान और सख्त रुख अपनाना जरूरी है।
डोभाल ने यह बात रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच में कही, जहाँ विभिन्न देशों के शीर्ष सुरक्षा प्रतिनिधि मौजूद थे।
अपने संबोधन में उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के अपराधियों, उनके संरक्षकों, वित्तपोषकों और संगठित नेटवर्क को अलग-अलग मानकों से नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, जब तक आतंक के पूरे ढांचे को समाप्त नहीं किया जाएगा, तब तक वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
एनएसए डोभाल ने यह भी कहा कि आतंकवाद अब केवल किसी एक देश या क्षेत्र की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैश्विक खतरा बन चुका है, जिसके खिलाफ सभी देशों को मिलकर, बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के कार्रवाई करनी होगी।
उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने पर भी बल दिया।
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह मुद्दा उठाता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह की नरमी या चयनात्मक दृष्टिकोण वैश्विक सुरक्षा को कमजोर करता है।
डोभाल के इस बयान को भारत के उसी लगातार रुख की पुनः पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ एक समान वैश्विक नीति की मांग की जाती रही है।













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