नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका साहस, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सुधारों के प्रति योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “वीर सावरकर की जयंती पर उन्हें स्मरण करता हूं। उनका साहस और राष्ट्रभक्ति सदैव लोगों को प्रेरित करती रहेगी। उनकी बौद्धिक क्षमता और सामाजिक सुधारों पर दिया गया बल भी अत्यंत उल्लेखनीय है।”
वीर सावरकर की जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्रियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सावरकर को निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित कर दिया।
अमित शाह ने एक्स पर लिखा, “स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। स्वतंत्रता संग्राम के निर्भीक योद्धा वीर सावरकर ने अपना संपूर्ण जीवन मातृभूमि की सेवा में समर्पित कर दिया। उनके जीवन और लेखन से राष्ट्र और उसकी विचारधारा के प्रति अटूट समर्पण की सीख मिलती है।”
उन्होंने सावरकर के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा, “‘हे मातृभूमि! जन्म से लेकर मृत्यु तक मैं तेरा ही हूं’ — यह वाक्य उनके राष्ट्रप्रेम की गहराई को दर्शाता है।”
गृह मंत्री ने आगे कहा कि छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सावरकर का संघर्ष और सामाजिक एकता के लिए उनके प्रयास सदैव लोगों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी वीर सावरकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, कवि, दार्शनिक और स्वतंत्रता सेनानी बताया। उन्होंने कहा, “स्वातंत्र्यवीर सावरकर केवल ओजस्वी राष्ट्रवादी विचारक ही नहीं थे, बल्कि प्रभावशाली वक्ता, कवि और दार्शनिक भी थे। उन्होंने अनेक यातनाएं सहते हुए अपना सर्वस्व भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सावरकर को “भारत माता के अमर सपूत” बताते हुए कहा कि उनकी क्रांतिकारी चेतना और संघर्षपूर्ण जीवन देश को सदैव राष्ट्रहित में समर्पण, साहस और अटूट संकल्प का संदेश देता रहेगा।
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में हुआ था। वे स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, वकील और लेखक थे। ‘हिंदुत्व’ शब्द को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है।













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