डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को व्हाइट हाउस में हुई एक कैबिनेट बैठक के दौरान ऐसा बयान दिया जिसने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ओमान ईरान के साथ मिलकर होरमुज़ जलडमरूमध्य के संचालन में किसी समझौते का हिस्सा बनता है, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई कर सकता है।
प्रेस से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वे ऐसे किसी अल्पकालिक समझौते को स्वीकार करेंगे जिसमें ईरान और ओमान मिलकर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को नियंत्रित करें, तो ट्रम्प ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
ट्रम्प ने कहा, “नहीं, यह जलडमरूमध्य सभी के लिए खुला रहेगा। यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है और ओमान को भी बाकी देशों की तरह व्यवहार करना होगा, वरना हमें उन्हें खत्म करना पड़ेगा। वे समझते हैं, वे ठीक रहेंगे।”
उनकी यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ओमान पश्चिम एशिया में अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी देश है और लंबे समय से क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। ओमान ने ईरान के साथ तनाव के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिशें भी की हैं।
व्हाइट हाउस की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया कि क्या राष्ट्रपति ने ओमान का नाम लेते समय गलती की थी या उनका इशारा वास्तव में ईरान की ओर था।
इसके बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने ट्रम्प के बयान का वीडियो और प्रतिलिपि साझा की, लेकिन उसमें भी किसी तरह का सुधार या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
बताया गया कि ट्रम्प ने इससे पहले भी ईरान और वेनेज़ुएला के नामों को लेकर भ्रमित करने वाली टिप्पणियाँ की थीं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उनकी भाषा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
ईरान ने संकेत दिया है कि वह होरमुज़ जलडमरूमध्य में एक नई व्यवस्था लागू करना चाहता है, जिसके तहत इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाया जा सकता है और राजस्व को ओमान के साथ साझा किया जा सकता है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया के लगभग पाँचवें हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
इस बीच क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है और अमेरिका तथा ईरान के बीच वार्ता भी कई बार रुक चुकी है, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावनाएँ फिलहाल अनिश्चित बनी हुई हैं।













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