डेस्क : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चंद्रमा पर स्थायी आधार (मून बेस) स्थापित करने की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत रोबोटिक लैंडर, चंद्र रोवर्स और हॉपिंग ड्रोन की सहायता से पहले बिना मानव दल के मिशन भेजे जाएंगे, और उसके बाद मानव उपस्थिति के साथ चंद्र सतह पर दीर्घकालिक ढांचा विकसित किया जाएगा।
नासा के अनुसार, यह प्रस्तावित चंद्र आधार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सैकड़ों वर्ग मील में विस्तारित होगा। यह क्षेत्र वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहाँ चंद्रमा के सबसे प्राचीन भू-भागों में से एक, साउथ पोल-ऐटकेन बेसिन स्थित है, जो सौरमंडल का सबसे बड़ा और प्राचीन प्रभाव क्रेटर माना जाता है। इस क्षेत्र से प्राप्त नमूने पृथ्वी-चंद्रमा प्रणाली के प्रारंभिक इतिहास और सौरमंडल के विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नासा ने अपने बयान में कहा कि यह पहल न केवल अंतरिक्ष में अमेरिकी नेतृत्व को मजबूत करेगी, बल्कि इससे वैज्ञानिक खोजों के नए द्वार खुलेंगे और ऐसी तकनीकों का विकास होगा जो भविष्य में मानव मिशन को मंगल ग्रह तक ले जाने में सहायक होंगी।
नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने कहा कि यह चंद्र आधार पृथ्वी के बाहर मानवता का पहला स्थायी ठिकाना होगा। उनके अनुसार प्रत्येक मानव और गैर-मानव मिशन सीखने का अवसर होगा, जिससे ऐसे वातावरण में रहने और कार्य करने की क्षमता विकसित की जा सकेगी जो अत्यंत कठिन और जोखिमपूर्ण है।
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के तहत इस वर्ष के अंत तक तीन बिना चालक वाले चंद्र मिशन—मून बेस–१, मून बेस–२ और मून बेस–३—लॉन्च करने की योजना है।
इसी क्रम में नासा ने चंद्र अन्वेषण को गति देने के लिए कई निजी अंतरिक्ष कंपनियों के साथ नई साझेदारियाँ भी घोषित की हैं। इनमें जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन, इंट्यूटिव मशीन्स और एस्ट्रोबॉटिक शामिल हैं। इन कंपनियों को चंद्र सतह तक उपकरण और तकनीक पहुँचाने के लिए अनुबंध दिए गए हैं।
इसके अलावा एस्ट्रोलैब और लूनर आउटपोस्ट को लूनर टेरेन व्हीकल्स के विकास के पहले चरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ब्लू ओरिजिन को चंद्र वाहन भेजने से संबंधित कार्यादेश दिया गया है, जबकि फायरफ्लाई एयरोस्पेस को उन विशेष ड्रोन और अंतरिक्ष यान विकसित करने का दायित्व मिला है जो नासा के चंद्र मिशन उपकरणों को चंद्रमा तक पहुँचाएंगे।
नासा के अनुसार एस्ट्रोलैब को २१९ मिलियन डॉलर और लूनर आउटपोस्ट को २२० मिलियन डॉलर का अनुबंध प्रदान किया गया है।
मिशन मून बेस–१ को इस वर्ष ब्लू ओरिजिन के ब्लू मून मार्क–१ कार्गो लैंडर के माध्यम से भेजने की योजना है। मून बेस–२ का प्रक्षेपण एस्ट्रोबॉटिक के ग्रिफिन लैंडर के जरिए और मून बेस–३ का प्रक्षेपण भी इसी वर्ष निर्धारित किया गया है।
इससे पहले अप्रैल में नासा ने आर्टेमिस–२ मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग दस दिनों के चंद्र कक्षीय अभियान पर सफलतापूर्वक भेजा था। इस दल में नासा के रीड वाइज़मैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टिना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसन शामिल थे।
नासा ने संकेत दिया है कि आर्टेमिस–३ मिशन वर्ष २०२७ में लॉन्च किया जा सकता है, जिसके तहत मानव को पुनः चंद्र सतह पर उतारने की तैयारी है।
इसी बीच भारत भी अपने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है। भारत का गगनयान मिशन वर्ष २०२७ में पहला स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन भेजने की तैयारी में है, जबकि चंद्रयान कार्यक्रम के तहत वर्ष २०२८ तक मानवयुक्त चंद्र मिशन का लक्ष्य रखा गया है। भारत २०३५ तक अपना राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और २०४० तक किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा की सतह पर भेजने की दीर्घकालिक योजना पर भी काम कर रहा है।
भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले आर्टेमिस समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जो चंद्र अन्वेषण में सहयोग, तकनीकी तालमेल और डेटा साझा करने के सिद्धांतों को निर्धारित करता है।
उधर चीन भी अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है। वह वर्ष २०३० तक मानव को चंद्रमा पर उतारने की योजना पर कार्य कर रहा है। हाल ही में चीन ने शेनझोउ–२३ अंतरिक्ष यान के माध्यम से अपने अंतरिक्ष यात्रियों को तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजा है।













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