नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बताया कि हाल ही में आयोजित प्रगति बैठक में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं में रेल, ऊर्जा और सड़क संपर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल थे।
बुधवार को प्रधानमंत्री ने प्रगति की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। यह एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित बहु-स्तरीय मंच है, जिसका उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करते हुए योजनाओं के तेज और समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। यह बैठक सेवा तीर्थ में आयोजित की गई।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस बैठक में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इनमें रेलवे, बिजली और सड़क संपर्क से जुड़ी परियोजनाएं प्रमुख रहीं। इसके साथ ही बंदरगाह, स्वच्छ भारत मिशन 2.0 और अन्य सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं पर भी चर्चा की गई।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्र की सात प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की, जो नौ राज्यों से संबंधित हैं। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 30,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। समीक्षा का मुख्य फोकस समयसीमा, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और लंबित मुद्दों के त्वरित समाधान पर रहा।
प्रधानमंत्री ने केन–बेतवा लिंक परियोजना और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की भी समीक्षा की। बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने शहरी क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर को तेजी से बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसे मिशन मोड में लागू किया जाना चाहिए ताकि बिजली लागत में कमी, ऊर्जा सुरक्षा में सुधार और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल सके।
सड़क और बंदरगाह संपर्क परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने वधावन बंदरगाह को एक मॉडल के रूप में विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसे केवल एक बंदरगाह के रूप में नहीं, बल्कि एक समेकित राष्ट्रीय लॉजिस्टिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां समुद्री परिवहन, अंतर्देशीय जलमार्ग, समर्पित माल ढुलाई गलियारे, उच्च गति रेल नेटवर्क, राजमार्ग और हवाई संपर्क को आपस में जोड़ा जाए।
स्वच्छ भारत मिशन 2.0 की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह मिशन केवल ढांचागत निर्माण तक सीमित न रहे, बल्कि इसका वास्तविक प्रभाव नागरिक भागीदारी, नियमित निगरानी और विभिन्न हितधारकों के समन्वय से दिखाई देना चाहिए। उन्होंने राज्यों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं, प्रसंस्करण संयंत्रों और गोबरधन परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने को कहा।
केन–बेतवा नदी जोड़ परियोजना पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान का एक उदाहरण बन सकती है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई सुधार के लिए इसी तरह की अन्य संभावनाओं की पहचान की जाए, जिससे दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सार्वजनिक परियोजनाओं में देरी केवल लागत में वृद्धि ही नहीं करती, बल्कि नागरिकों को समय पर सुविधाओं से वंचित भी करती है। उन्होंने सभी मंत्रालयों, विभागों और राज्यों से अपील की कि लंबित मुद्दों के समाधान के लिए अधिक सक्रिय और समयबद्ध दृष्टिकोण अपनाया जाए।
बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसार सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की व्यवस्था राज्य स्तर पर लागू की जा चुकी है। इसका उद्देश्य योजनाओं की नियमित निगरानी, क्रियान्वयन संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान और जिला तथा राज्य स्तर पर अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
इस पहल के अंतर्गत सबसे पहले स्वच्छ भारत मिशन की राज्य स्तरीय समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की गई है।













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