डेस्क : अपनी सहज अभिनय शैली और प्रभावशाली संवाद अदायगी के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी का कहना है कि अभिनय और कहानी कहने की कला की प्रेरणा उन्हें किसी संस्थान या फिल्म जगत से नहीं, बल्कि अपने घर और पारिवारिक माहौल से मिली है।
हाल ही में एक बातचीत के दौरान पंकज त्रिपाठी ने कहा कि उनके परिवार में किस्से-कहानियां सुनाने की समृद्ध परंपरा रही है। बचपन में घर के बुजुर्गों को जीवन के अनुभवों और लोककथाओं को रोचक ढंग से सुनाते हुए देखकर उन्होंने कहानी कहने की कला सीखी। उनका मानना है कि कलाकार के व्यक्तित्व और अभिनय शैली के निर्माण में उसके परिवेश की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
बिहार के गोपालगंज जिले के ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े पंकज त्रिपाठी ने कहा कि गांव का जीवन, वहां के लोग, उनकी बोलचाल और जीवन के अनुभव आज भी उनके अभिनय का आधार हैं। उन्होंने बताया कि अभिनय केवल तकनीक का विषय नहीं है, बल्कि जीवन को करीब से समझने और महसूस करने की प्रक्रिया भी है। इसी कारण उनके अधिकांश किरदार दर्शकों को वास्तविक और अपने आसपास के लोगों जैसे लगते हैं।
अभिनेता ने कहा कि घर के वातावरण ने उन्हें लोगों को ध्यान से सुनना, उनके व्यवहार को समझना और छोटी-छोटी बातों को आत्मसात करना सिखाया। यही अनुभव आगे चलकर उनके अभिनय और कहानी कहने की शैली का हिस्सा बने।
पंकज त्रिपाठी ने अपने करियर में फिल्मों, वेब सीरीज और टेलीविजन के माध्यम से अनेक यादगार भूमिकाएं निभाई हैं। उनकी पहचान ऐसे अभिनेता के रूप में बनी है जो साधारण पात्रों को भी अपनी अदाकारी से असाधारण बना देते हैं।













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