डेस्क : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सस्ते आटे और बिजली की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब व्यापक जनविद्रोह का रूप लेता दिखाई दे रहा है। क्षेत्र के विभिन्न शहरों में बंद, प्रदर्शन और विरोध मार्च जारी हैं, जबकि प्रशासन की सख्ती के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन की शुरुआत आटा और बिजली पर सब्सिडी बहाल करने की मांग से हुई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्थानीय संसाधनों का लाभ क्षेत्र की जनता को नहीं मिल रहा, जबकि महंगाई और बढ़ती बिजली दरों ने आम लोगों का जीवन कठिन बना दिया है।
हाल के दिनों में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव बढ़ गया है। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस कार्रवाई और झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है तथा अनेक लोग घायल हुए हैं। इसके बाद विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए हैं। कई शहरों में बाजार बंद रहे और जनजीवन प्रभावित हुआ।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर प्रशासन ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी को प्रतिबंधित घोषित कर दिया है। संगठन के प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के लिए इनाम की भी घोषणा की गई है। दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय नागरिक समूहों ने प्रशासन की कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की है।
प्रदर्शनकारियों की मांगें अब केवल आटा और बिजली तक सीमित नहीं रह गई हैं। वे राजनीतिक प्रतिनिधित्व, स्थानीय अधिकारों, संसाधनों पर नियंत्रण तथा प्रशासनिक सुधारों की भी मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्षों से क्षेत्र की जनता आर्थिक कठिनाइयों और राजनीतिक उपेक्षा का सामना कर रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों को लगाया गया है। हालांकि पीओके के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है, लेकिन फिलहाल आंदोलन थमता नहीं दिख रहा।
विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक मांगों से शुरू हुआ यह आंदोलन अब व्यापक असंतोष का प्रतीक बन गया है। यदि स्थिति का समाधान शीघ्र नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में राजनीतिक और प्रशासनिक संकट और गहरा सकता है।













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