नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी फ्रांस यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस के बीच बहुप्रतीक्षित राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर महत्वपूर्ण प्रगति होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद और उनके भारत में निर्माण को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
प्रस्तावित सौदे के तहत भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल विमान खरीदे जाएंगे, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। इनमें से 18 विमान सीधे फ्रांस से प्राप्त होंगे, जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। यह पहली बार होगा जब राफेल लड़ाकू विमानों का बड़े पैमाने पर निर्माण फ्रांस के बाहर किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, भारत ने स्पष्ट किया है कि ‘मेक इन इंडिया’ नीति के अनुरूप विमानों में कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग होना चाहिए। इसी मुद्दे पर पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच विस्तृत बातचीत चल रही है। यदि इस पर सहमति बन जाती है तो प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की बैठक के दौरान समझौते की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नए राफेल विमानों में अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां, उन्नत मिसाइलें और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताएं शामिल की जा सकती हैं, जिससे उनकी मारक क्षमता वर्तमान संस्करणों की तुलना में और अधिक प्रभावी होगी। हाल ही में फ्रांस ने राफेल से नई पीढ़ी की एमआईसीए-एनजी मिसाइल का सफल परीक्षण भी किया है।
भारतीय वायुसेना वर्तमान में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी से जूझ रही है। ऐसे में 114 अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद को वायुसेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय पहले ही फ्रांस को औपचारिक अनुरोध पत्र (एलओआर) भेज चुका है, जिससे सौदे की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।
राफेल कार्यक्रम के साथ भारत में विमान निर्माण, एयरोस्पेस विनिर्माण और रक्षा उद्योग को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। फ्रांसीसी कंपनियां इंजन, ढांचे और अन्य प्रमुख पुर्जों के निर्माण में भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़ाने पर भी विचार कर रही हैं।













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