नई दिल्ली : भारत ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) द्वारा ओमान तट के पास किए गए एक सैन्य अभियान में भारतीय नाविकों के प्रभावित होने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब पनामा (पलाऊ) ध्वज वाले तेल टैंकर एम/टी सेट्टेबेलो को निशाना बनाया गया।
सेंटकॉम के अनुसार, जहाज़ को “सटीक हथियारों” से उसके इंजन कक्ष में निशाना बनाया गया क्योंकि वह कथित रूप से ईरान से तेल परिवहन कर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था।
घटना के बाद भारत ने बुधवार को अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब किया। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने भारत की “गहरी चिंता” से अवगत कराते हुए कहा कि भारतीय समुद्री समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार दुनिया भर में फैले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और पश्चिम एशिया तथा फारस की खाड़ी में स्थित भारतीय नागरिकों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि घटना के बाद अमेरिकी पक्ष के समक्ष “कड़ा विरोध” दर्ज कराया गया और नाविकों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट आपत्ति जताई गई।
मंत्रालय के अनुसार भारत ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में वाणिज्यिक जहाज़ों और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा हमलों को तुरंत रोका जाना चाहिए। साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत निर्बाध नौवहन और क्षेत्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ओमान के पास हुए इस हमले में जहाज़ पर सवार 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों में से 21 को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि तीन भारतीय लापता बताए जा रहे हैं। भारतीय दूतावास ओमान प्रशासन के साथ मिलकर राहत और खोज-बचाव अभियान की निगरानी कर रहा है।
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि यह कार्रवाई उस समय की गई जब जहाज़ ने ईरान से तेल परिवहन के कथित प्रयास के दौरान “प्रतिबंधों का उल्लंघन” किया। अमेरिकी बयान के अनुसार, जहाज़ के इंजन कक्ष को निशाना बनाकर उसे निष्क्रिय किया गया।
सेंटकॉम ने यह भी कहा कि अब तक आठ जहाज़ों को निष्क्रिय किया जा चुका है, 134 जहाज़ों को वापस मोड़ा गया है और 42 मानवीय सहायता जहाज़ों को सुरक्षित मार्ग दिया गया है।
भारत ने एक बार फिर क्षेत्र में तनाव कम करने, कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों—विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य—में सुरक्षित एवं निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने की अपील की है।













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