डेस्क: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बागी रुख अपनाने वाले सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कुत्ते तो हैं, लेकिन उनमें वफादारी नहीं है। राउत की इस टिप्पणी के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
शिवसेना के स्थापना दिवस के अवसर पर दोनों गुटों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज रहा। हाल के दिनों में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों द्वारा पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों से दूरी बनाए जाने के बाद उनके एकनाथ शिंदे गुट में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। इसी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने बागी सांसदों को पार्टी और मतदाताओं के साथ विश्वासघात करने वाला बताया।
राउत ने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी कार्यकर्ताओं ने मेहनत कर जिताया, यदि वे दल बदलने का फैसला करते हैं तो उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा देकर जनता के बीच जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कुछ सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए प्रलोभन दिए जा रहे हैं और लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं का उन पर विश्वास नहीं रहा तो वह नेतृत्व छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन पार्टी को उन लोगों के हाथों में नहीं सौंपेंगे जिन्हें वह विश्वासघाती मानते हैं।
उधर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्षी गुट में जारी असंतोष को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा है कि वर्तमान घटनाक्रम “सिर्फ ट्रेलर” है और आने वाले दिनों में राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट होगी। उनके इस बयान को शिवसेना (यूबीटी) में बढ़ती अंदरूनी चुनौती के संदर्भ में देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच बढ़ता टकराव अब केवल संगठनात्मक नियंत्रण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोकसभा में राजनीतिक ताकत और भविष्य की रणनीति की लड़ाई का भी रूप लेता दिखाई दे रहा है।













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