भारत की वैश्विक यात्रा में कुछ उपलब्धियाँ केवल कूटनीतिक सफलता नहीं होतीं, वे राष्ट्र के बढ़ते आत्मविश्वास और विश्व मंच पर उसकी स्वीकार्यता का प्रतीक बन जाती हैं। वित्तीय अपराधों और आतंकवाद के वित्तपोषण के विरुद्ध दुनिया की सबसे प्रभावशाली संस्था एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) में भारत का पहली बार उपाध्यक्ष पद पर चुना जाना ऐसी ही एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
विश्व मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा
दशकों तक भारत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अपनी भूमिका को मजबूत करने का प्रयास करता रहा। आज वही भारत उन संस्थाओं के नेतृत्वकारी पदों तक पहुँच रहा है, जो वैश्विक नीतियों की दिशा निर्धारित करती हैं। एफएटीएफ में उपाध्यक्ष पद पर भारत का चयन इस बात का प्रमाण है कि दुनिया अब भारत को केवल एक बड़े बाजार या विकासशील अर्थव्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय सुरक्षा के विश्वसनीय संरक्षक के रूप में भी देख रही है।
शुक्रवार को वित्त मंत्रालय द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, मध्य प्रदेश कैडर के 1994 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी विवेक अग्रवाल को जुलाई 2026 से जून 2027 तक के कार्यकाल के लिए एफएटीएफ का उपाध्यक्ष चुना गया है। वर्तमान में वे संस्कृति मंत्रालय में सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उनके नाम को एफएटीएफ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, प्लेनरी, ने स्वीकृति प्रदान की।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पद?
पेरिस स्थित एफएटीएफ दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण और सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के लिए होने वाले वित्तपोषण के खिलाफ मानक निर्धारित करता है। इसके दिशा-निर्देशों को विश्व के अधिकांश देश अपनी वित्तीय और नियामक नीतियों का आधार मानते हैं।
उपाध्यक्ष का पद केवल औपचारिक नहीं होता। यह वह भूमिका है जो संगठन के अध्यक्ष के साथ मिलकर वैश्विक वित्तीय खतरों की पहचान करती है, नीतिगत दिशा तय करती है और सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करती है। ऐसे में किसी भारतीय अधिकारी का इस पद तक पहुँचना भारत की विश्वसनीयता और नेतृत्व क्षमता की बड़ी स्वीकृति माना जा रहा है।
वर्षों की मेहनत का परिणाम
यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने धनशोधन-रोधी और आतंकवाद-निरोधी वित्तीय ढाँचे को मजबूत करने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विस्तार, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की निगरानी और आतंकवाद के लिए धन जुटाने वाले नेटवर्कों पर कार्रवाई ने भारत की साख को मजबूत किया है।
भारत ने एफएटीएफ की हालिया पारस्परिक मूल्यांकन प्रक्रिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। साथ ही वर्चुअल एसेट सेवा प्रदाताओं, क्रिप्टो परिसंपत्तियों और डिजिटल भुगतान प्रणालियों से जुड़े उभरते जोखिमों पर वैश्विक नीति निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाई। यही कारण है कि 200 से अधिक न्यायक्षेत्रों वाले एफएटीएफ वैश्विक नेटवर्क ने भारत पर विश्वास जताया।
एक अधिकारी नहीं, पूरे राष्ट्र का सम्मान
अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए विवेक अग्रवाल ने कहा कि यह सम्मान भारत के सामूहिक प्रयासों और धनशोधन तथा आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ देश के मजबूत ढाँचे की पहचान है। उन्होंने इसे अपने लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि वे वैश्विक वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित, समावेशी और मजबूत बनाने के लिए एफएटीएफ नेटवर्क के साथ मिलकर कार्य करेंगे।
वहीं राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उनके अनुसार यह नियुक्ति अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत करती है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की आवाज़ को मिलेगा बल
भारत लंबे समय से आतंकवाद और उसके वित्तपोषण के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाता रहा है। अनेक अवसरों पर भारत ने यह प्रश्न भी उठाया कि आतंकवादी संगठनों को मिलने वाला धन वैश्विक सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा है। एफएटीएफ के नेतृत्वकारी ढाँचे में भारत की उपस्थिति अब इन मुद्दों पर उसकी आवाज़ को और अधिक प्रभावशाली बनाएगी।
यह उपलब्धि विशेष रूप से ऐसे समय में आई है जब सीमापार वित्तीय अपराध, अवैध धन प्रवाह, साइबर वित्तीय धोखाधड़ी और आतंकवादी नेटवर्कों को मिलने वाली आर्थिक सहायता विश्व अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती बनी हुई है।
एक नए युग की शुरुआत
सन् 1989 में स्थापित एफएटीएफ आज वैश्विक वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण प्रहरी माना जाता है। ऐसे संगठन में भारत का उपाध्यक्ष बनना केवल एक पद प्राप्त करना नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास का प्रमाण है जो दुनिया भारत की संस्थागत क्षमता, आर्थिक परिपक्वता और जिम्मेदार नेतृत्व पर व्यक्त कर रही है।
यह उपलब्धि बताती है कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल नियमों का पालन करने वाला देश नहीं, बल्कि नियमों की दिशा तय करने वाला राष्ट्र बन रहा है। एफएटीएफ के उपाध्यक्ष पद तक भारत की यह यात्रा आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय शासन, सुरक्षा और पारदर्शिता के क्षेत्र में उसकी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने वाली सिद्ध हो सकती है।













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