तेहरान : ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए समझौते के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से जहाजों के लिए खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि, इसके साथ ही ईरान समर्थित पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) ने जहाजों के आवागमन के लिए नए नियम भी लागू कर दिए हैं।
नए नियमों के अनुसार, किसी भी वाणिज्यिक जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए कम से कम 48 घंटे पहले ट्रांजिट अनुरोध देना होगा। जहाजों को अपने मार्ग, समय और सुरक्षा संबंधी विवरण पहले से साझा करने होंगे ताकि समुद्री यातायात को नियंत्रित किया जा सके और दुर्घटनाओं की आशंका कम हो।
ईरान ने घोषणा की है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक जहाजों से सुरक्षा, पर्यावरण और बीमा संबंधी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि, इस अवधि के बाद समुद्री मार्ग के उपयोग पर शुल्क या बीमा शुल्क लगाए जाने की संभावना जताई गई है। इस प्रस्ताव को लेकर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग और कई देशों ने चिंता भी व्यक्त की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही जलडमरूमध्य को औपचारिक रूप से खोल दिया गया हो, लेकिन क्षेत्र में बिछाई गई समुद्री सुरंगों (माइंस) और सुरक्षा जोखिमों के कारण सामान्य समुद्री यातायात बहाल होने में अभी समय लग सकता है। कई शिपिंग कंपनियां स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने तक सावधानी बरत रही हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का परिवहन इसी मार्ग से होता है। पिछले कुछ महीनों से क्षेत्रीय तनाव और संघर्ष के कारण यहां समुद्री यातायात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों पर भी असर पड़ा।
समझौते के बाद कुछ जहाजों की आवाजाही शुरू हो चुकी है और ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद है। भारत सहित कई देशों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग कितनी तेजी से सामान्य स्थिति में लौट पाता है।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत