डेस्क : देश में एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग और आपूर्ति से जुड़े नए नियमों को लेकर उपभोक्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार हाल के महीनों में सरकार और तेल विपणन कंपनियों द्वारा एलपीजी वितरण प्रणाली को अधिक नियंत्रित और व्यवस्थित बनाने के लिए कुछ नए प्रावधान लागू किए गए हैं, जिनमें 30 दिन और 90 दिन से जुड़े नियम चर्चा में हैं।
नई व्यवस्था के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एक सिलेंडर की बुकिंग और दूसरे सिलेंडर की बुकिंग के बीच न्यूनतम समय अंतराल तय किया गया है, जो आमतौर पर 25 से 30 दिनों तक बताया जा रहा है। इस नियम का उद्देश्य होर्डिंग रोकना और सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में यह भी प्रावधान सामने आए हैं कि जहां पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर एलपीजी से पीएनजी की ओर स्थानांतरित होने के लिए कहा जा सकता है। इस तरह के बदलाव के लिए लगभग 90 दिनों की अवधि का उल्लेख भी विभिन्न रिपोर्टों में किया गया है, हालांकि इसकी अंतिम और समान रूप से लागू होने वाली तारीख को लेकर स्पष्टता नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये बदलाव मुख्य रूप से गैस आपूर्ति श्रृंखला को अधिक पारदर्शी बनाने, सब्सिडी व्यवस्था को बेहतर करने और काला बाज़ारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। साथ ही डिजिटल बुकिंग, ओटीपी आधारित डिलीवरी और ई-केवाईसी जैसी व्यवस्थाओं को भी तेजी से लागू किया जा रहा है।
हालांकि उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि लगातार बदलते नियमों और अलग-अलग समय सीमा के कारण आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उनका मानना है कि सरकार को इन नियमों को स्पष्ट और एकरूप तरीके से लागू करना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं को असुविधा न हो।
तेल मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य देश में एलपीजी वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाना और जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक आपूर्ति को और अधिक प्रभावी बनाना है।













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