नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और अन्य के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को लेकर अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने बड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने एक संघीय अदालत में दाखिल अपने विस्तृत पक्ष में कहा है कि यह मामला “कभी दर्ज ही नहीं होना चाहिए था” और इसे अब स्थायी रूप से खारिज किया जाना चाहिए।
अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत को बताया कि इस मामले में लगाए गए आरोप कानूनी और तथ्यात्मक रूप से कमजोर हैं, और इसे आगे बढ़ाना न तो उचित है और न ही सार्वजनिक हित में। विभाग ने यह भी तर्क दिया कि अभियोजन को समाप्त करने का निर्णय पूरी तरह न्यायिक नीति और विवेकाधिकार के तहत लिया गया है।
अदालत की भूमिका और DOJ का पक्ष
DOJ ने अपने दस्तावेज में कहा कि अदालत की भूमिका सीमित है और जब सरकार स्वयं किसी मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती, तो उसे खारिज किया जाना चाहिए। विभाग ने यह भी संकेत दिया कि इस केस में अभियोजन जारी रखना अनावश्यक कानूनी अनिश्चितता पैदा कर रहा है।
मामला क्यों सुर्खियों में है
यह मामला वर्ष 2024 में दर्ज किया गया था, जिसमें अडानी समूह और कुछ अन्य लोगों पर कथित वित्तीय अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोप लगाए गए थे। हालांकि अडानी समूह ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है।
अब अमेरिकी न्याय विभाग के इस नए रुख ने मामले की दिशा पूरी तरह बदल दी है और अदालत में इसकी स्थायी समाप्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
अदालत की निगरानी जारी
हालांकि DOJ ने केस खत्म करने की मांग की है, लेकिन संघीय न्यायालय ने अभी अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अदालत ने पहले भी मामले में और स्पष्ट कारणों की मांग की थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि अंतिम फैसला पूरी तरह न्यायिक समीक्षा के बाद ही आएगा।
यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कारोबारी और कानूनी हलकों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें एक बड़े वैश्विक कारोबारी समूह और अमेरिकी अभियोजन प्रणाली से जुड़े सवाल शामिल हैं।













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