डेस्क : वैश्विक स्तर पर बढ़ते भूराजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और वित्तीय जोखिमों के बीच दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिजर्व) में लगातार बढ़ोतरी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक हालात में सोना एक सुरक्षित निवेश के रूप में उभर रहा है, इसलिए केंद्रीय बैंक अपनी रिजर्व रणनीति में इसे अधिक महत्व दे रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय बैंकों द्वारा रिकॉर्ड स्तर पर सोने की खरीद की गई है। युद्ध जैसे हालात, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को देखते हुए कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को अधिक सुरक्षित और विविध बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी रणनीति के तहत सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई जा रही है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी हाल के वर्षों में अपने गोल्ड रिजर्व में लगातार वृद्धि की है। जानकारों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की अधिक हिस्सेदारी से वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव और मुद्रा संबंधी जोखिमों का प्रभाव कम करने में मदद मिलती है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में सोना केवल निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि देशों की आर्थिक सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। यही कारण है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी दीर्घकालिक रिजर्व नीति में सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं।













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