डेस्क : यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की नाबालिग लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह की घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। संसद ने पाकिस्तान सरकार से अल्पसंख्यक लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने का आग्रह किया है।
प्रस्ताव में 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया शाहबाज के मामले का विशेष उल्लेख किया गया है। यूरोपीय सांसदों के अनुसार, मार्च 2026 में मारिया का कथित रूप से अपहरण कर जबरन इस्लाम धर्म स्वीकार कराया गया और उसके अपहरणकर्ता से विवाह करा दिया गया। संसद ने इस मामले को पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का प्रतीक बताया है।
यूरोपीय संसद ने मांग की है कि मारिया शाहबाज को कानूनी सहायता, अपने परिवार से मिलने का अधिकार और मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, नाबालिगों या जबरदस्ती से जुड़े सभी मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
प्रस्ताव में पाकिस्तान से बाल विवाह रोकने के लिए बने राष्ट्रीय ढांचे को पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू करने तथा अपहृत या जबरन धर्मांतरित की गई अल्पसंख्यक लड़कियों के परिवारों की शिकायतों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष तंत्र स्थापित करने की भी मांग की गई है। संसद ने यह भी कहा कि ऐसी लड़कियों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
यूरोपीय संसद ने संयुक्त राष्ट्र के 2025 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जबरन धर्मांतरण के बाद विवाह के मामलों में प्रभावित महिलाओं और लड़कियों में लगभग 75 प्रतिशत हिंदू और 25 प्रतिशत ईसाई समुदाय से थीं, जो धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है।
संसद ने ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान (HRFP) द्वारा उठाई गई चिंताओं का भी उल्लेख किया। संगठन का कहना है कि मारिया शाहबाज का मामला कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि पाकिस्तान में विशेषकर ईसाई और हिंदू समुदाय की नाबालिग लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और जबरन विवाह की लगातार सामने आ रही घटनाओं का हिस्सा है।
एचआरएफपी के अनुसार, मारिया शाहबाज का 29 जुलाई 2025 को लाहौर से अपहरण किया गया था। बाद में मजिस्ट्रेट के समक्ष यह दावा किया गया कि उसने स्वेच्छा से इस्लाम स्वीकार कर 30 वर्षीय व्यक्ति से विवाह किया है। हालांकि सरकारी दस्तावेजों में उसकी उम्र नाबालिग होने की पुष्टि के बावजूद मार्च 2026 में संघीय संवैधानिक न्यायालय ने विवाह को बरकरार रखते हुए उसकी अभिरक्षा आरोपी को सौंप दी। फिलहाल उसका परिवार न्याय के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखे हुए है।













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