डेस्क : केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विशाखापत्तनम में स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया। इसके साथ ही भारतीय नौसेना की उन्नत प्रोजेक्ट-17ए नीलगिरि श्रेणी के युद्धपोतों की श्रृंखला पूरी हो गई।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश देश के रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण का नया शक्ति केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य अब वायु, जल, थल और मानव रहित (अनमैन्ड) रक्षा प्रणालियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि पुट्टपर्थी में एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) के कोर इंटीग्रेशन एवं फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर की आधारशिला रखी गई है। वहीं, अनकापल्ली जिले में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) की नई नौसैनिक प्रणाली निर्माण इकाई स्थापित की जा रही है, जहां स्वायत्त अंडरवाटर व्हीकल, टॉरपीडो और अंडरवाटर काउंटर मेजर सिस्टम का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि जिन हथियार प्रणालियों के लिए भारत पहले विदेशों पर निर्भर था, उनका निर्माण अब देश में ही किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि एएमसीए आसमान में, बीडीएल की नौसैनिक प्रणालियां समुद्र की गहराइयों में, कुरनूल के ड्रोन मानव रहित क्षेत्र में और आईएनएस महेंद्रगिरि समुद्र की सतह पर भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करेंगे। इससे स्पष्ट होता है कि आंध्र प्रदेश रक्षा क्षेत्र के सभी प्रमुख आयामों में देश की शक्ति बढ़ाने में योगदान दे रहा है।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित आईएनएस महेंद्रगिरि लगभग 6,670 टन वजनी बहुउद्देश्यीय युद्धपोत है। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण और तकनीक का उपयोग किया गया है। युद्धपोत में स्वदेशी रॉकेट एवं टॉरपीडो लॉन्चर, अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्रणाली तथा ब्रह्मोस सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस होने की क्षमता है।
रक्षा मंत्री ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारतीय नौसेना की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के माध्यम से नौसेना ने 18 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट किया, जिनमें 9,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का आवश्यक सामान था। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना अब केवल युद्धक बल ही नहीं, बल्कि देश के आर्थिक हितों की भी मजबूत संरक्षक बन चुकी है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले लगभग डेढ़ वर्ष में भारतीय नौसेना को छह अत्याधुनिक फ्रिगेट प्राप्त हुए हैं, जो भारत की जहाज निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल समुद्रों में अपना मार्ग तय नहीं कर रहा, बल्कि समुद्री रणनीति की दिशा भी तय करने की क्षमता विकसित कर रहा है।
हाइब्रिड युद्ध की बदलती चुनौतियों का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि नई तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमता दोनों का संतुलित विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्म के बिना अधूरी है और पारंपरिक सैन्य शक्ति नई तकनीक के बिना कमजोर पड़ जाती है। भारत दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आईएनएस महेंद्रगिरि के नौसेना में शामिल होने से भारत की पूर्वी समुद्री सीमा पर सामरिक क्षमता और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी तथा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।













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