भोपाल : मध्य प्रदेश में करीब 1160 करोड़ रुपये के कथित चावल-एथेनॉल घोटाले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। आरोप है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित सरकारी चावल के इस्तेमाल में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं और गरीबों, बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए निर्धारित पोषण व्यवस्था से जुड़े चावल का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया।
मामले में आरोप लगाया गया है कि सरकार की ओर से एथेनॉल बनाने के लिए उपलब्ध कराए गए चावल को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपयोग करने के बजाय गलत तरीके से अन्य माध्यमों में खपाया गया। बताया जा रहा है कि बड़ी मात्रा में चावल के आवंटन, परिवहन और उपयोग की प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका सामने आई है।
आरोपों के मुताबिक, इस मामले में फोर्टिफाइड चावल भी शामिल है, जिसे पोषण सुधार के उद्देश्य से तैयार किया जाता है। यह चावल कई सरकारी योजनाओं के तहत बच्चों, किशोरियों और गर्भवती महिलाओं तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में इसके दुरुपयोग के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यह मामला गरीबों और जरूरतमंदों के अधिकारों से जुड़ा है और इसमें शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं, प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।













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