नई दिल्ली: दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं मिलने के कारणों को लेकर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि जमानत देने या खारिज करने का फैसला प्रत्येक आरोपी की भूमिका और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर किया जाता है।
सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि इस मामले में सभी आरोपियों की स्थिति एक जैसी नहीं थी। अदालत ने आरोपियों की कथित भूमिका, उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी की जमानत पर फैसला केवल हिरासत की अवधि के आधार पर नहीं लिया जा सकता।
दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जमानत के लिए कानून में निर्धारित कड़े प्रावधानों को ध्यान में रखना होता है।
सीजेआई ने यह भी कहा कि लंबे समय तक मुकदमे का लंबित रहना चिंता का विषय है और मामलों की सुनवाई जल्द पूरी करने की आवश्यकता है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि गंभीर आरोपों वाले मामलों में जमानत पर निर्णय लेते समय कानूनी प्रक्रिया और मामले की परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जाती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े मामले में कई लोगों पर कथित साजिश रचने के आरोप लगाए गए थे। उमर खालिद और शरजील इमाम इसी मामले में लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं।













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