नई दिल्ली : शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जनता की चिंताओं को गंभीरता से सुनने की अपील की है। वांगचुक ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जनता की बात सुनना सरकार की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी मजबूती को दर्शाता है।
जंतर-मंतर पर जारी अपने आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार की मांग उठाना है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।
वांगचुक ने कहा कि केवल किसी एक व्यक्ति के हटने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए परीक्षा और शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए संदेश देते हुए वांगचुक ने कहा कि सरकार को लोगों की भावनाओं और समस्याओं को सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता और सरकार के बीच विश्वास का रिश्ता सबसे महत्वपूर्ण होता है और यह रिश्ता संवाद के माध्यम से ही मजबूत होता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित नहीं है। वांगचुक ने सभी राजनीतिक दलों और आम लोगों से अपील की कि वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा और समाधान की दिशा में आगे आएं।
सोनम वांगचुक ने लंबे समय से शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में काम किया है। उनके अनुसार, देश के विकास के लिए जरूरी है कि युवाओं को एक निष्पक्ष और बेहतर अवसर देने वाली व्यवस्था मिले।













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