नई दिल्ली:भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में कई बिंदुओं पर टकराव की स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। भारतीय सेना को कई मोर्चों पर सफलता मिली है, लेकिन डेप्सांग समेत कुछ ऐसे बिंदु हैं, जिसपर दोनों देशों की बातचीत चल रही है। भारत ने भी सीमा पर 350 आर्टिलरी सिस्टम और हॉवित्जर की तैनाती की, जिसके बाद अब खास प्लान बनाया है।सेना ने चीन को चारों खाने चित करने के लिए लंबी दूरी तक नजर बनाए रखने वाले विभिन्न प्रकार के ड्रोन और निगरानी उपकरणों की खरीद शुरू कर दी है। 80 मिनी रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (RPAS), 10 रनवे-इंडिपेंडेंट RPAS, 44 अपग्रेडेड लॉन्ग-रेंज सर्विलांस सिस्टम और 106 इनर्टियल नेविगेशन सिस्टम की स्वदेशी खरीद के लिए RFP (प्रस्ताव के लिए अनुरोध) अगले कुछ दिनों के भीतर जारी किए जाएंगे। अभी आर्मी के एविएशन विंग द्वारा बड़े अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स जैसे इजरायली हेरॉन और सर्चर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नए छोटे RPAS की रेंज 15-20 किलोमीटर से लेकर 60-90 किलोमीटर तक की होती है। ऊंचे इलाकों में सर्विलांस के लिए ये अच्छी तरह परफॉर्म करते हैं। ये RPAS लुटेरिंग मूनिशन या कामिकेज़ ड्रोन से अलग हैं। इसके अलावा स्वायत्त निगरानी और सशस्त्र ड्रोन स्वार (A-SADS) भी सेना की मजबूती के लिए खरीदे जा रहे हैं। सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने हाल ही में कहा था कि पिछले दो वर्षों में पूर्वी लद्दाख के अग्रिम इलाकों में सीमा बुनियादी ढांचे का महत्वपूर्ण स्तर विकसित किया गया है।
लद्दाख गतिरोध के दौरान कई हथियारों की तैनाती
इसमें 35,000 सैनिकों के आवास के साथ-साथ 450 टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहनों के लिए गैरेज शामिल हैं। इसके अलावा 350 आर्टिलरी सिस्टम और हॉवित्जर भी हैं। लद्दाख में ढाई महीने से चल रहे गतिरोध के चलते कई तरह के हथियारों की तैनाती की गई है। इसमें 105 मिमी फील्ड गन, बोफोर्स हॉवित्जर, अपगन धनुष, शारंग तोपों से लेकर नए M-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर और K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन तक शामिल हैं। स्वदेशी पिनाका मल्टी-लॉन्च रॉकेट सिस्टम की भी तैनाती है।
30-40 किमी होती है आर्टिलरी गन की रेंज
बता दें कि आर्टिलरी गन की स्ट्राइक रेंज 30 से 40 किमी तक होती है, वहीं रॉकेट 90 किमी तक जा सकते हैं। दिन और रात की क्षमता वाले नए RPAS की फॉर्वर्ड पोस्ट्स द्वारा जरूरत होगी। एक स्वदेशी LORROS (लंबी दूरी की टोही और ऑब्जर्वेशन सिस्टम) की भी टेस्टिंग शुरू होने वाली है। मौजूदा इजरायली लोरोस को दो दशक पहले शामिल किया गया था। वहीं, सेना ने बताया है कि नए मैन-पोर्टेबल मिनी-आरपीएएस, जिसका कुल वजन 15 किलोग्राम है, की मिशन रेंज 15 किलोमीटर से कम नहीं होनी चाहिए और कम से कम 90 मिनट की ऑपरेशनल क्षमता होनी ही चाहिए।
हाल ही में हुई है एक और दौर की वार्ता
पिछले शुक्रवार को भारत और चीन के बीच एक और दौर की बातचीत हुई। राजनयिक स्तर की बातचीत के इस दौर में भी कोई भी सफलता नहीं मिली। दोनों पक्षों ने बताया कि वे बॉर्डर पर बाकी बचे मुद्दों का हल निकालने के लिए आगे भी बातचीत करते रहेंगे। मालूम हो कि भारत और चीन के बीच मई 2020 से ही लद्दाख में तनातनी जारी है। इस दौरान, 50 हजार से ज्यादा सैनिकों की तैनाती भी की गई। लगभग दो दर्जन बैठकों के बाद दोनों ने पैंगोंग त्सो, गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स के किनारों से सैनिकों को वापस बुला लिया, लेकिन अब भी डेप्सांग और डेमचोक के बिंदुओं को लेकर मामला नहीं सुलझ सका है।













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