नई दिल्ली:खस्ता हाल पाकिस्तान पर से उसके ‘खास दोस्त’ चीन का भी विश्वास उठ रहा है। दिवालिया हो रहा है पाकिस्तान अब ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) प्रोजेक्ट’ में अपना हाथ जलाना नहीं चाहता। इस देखते हुए चीन को भी यह अहसास हो गया है कि पाकिस्तान में भी श्रीलंका जैसा हाल होने वाला है। मौजूदा परिस्थितियों के कारण जनता कभी सड़क पर आ सकती है।
पाकिस्तान में तैयार की रही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना भी अब धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में जा रही है। जब प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी तो इसे पाकिस्तान की समृद्धि का प्रतीक माना जा रहा था। मगर अब आलम ये है कि इस प्रोजेक्ट के तहत कई काम अभी शुरू नहीं हुए हैं। जबकि कुछ प्रोजेक्ट्स जो चल रहे हैं उनमें देनदारियां ज्यादा हो गई हैं और चीन को घाटा भी हो रहा है।
सीपीईसी सौदे का आधार बना भ्रष्टाचार
भ्रष्टाचार पाकिस्तान में सीपीईसी सौदे का एक आधार रहा है। इसमें शामिल अधिकारियों और कंपनियों को घूस मिली और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बिना किसी अस्पष्टता के सब कुछ अनदेखा कर दिया गया। सीपीईसी प्रोजेक्ट को एक दशक पहले शुरू किया गया था। हालांकि, सात साल बाद, इस प्रोजेक्ट के तरह कई कामों को अभी भी शुरू नहीं किया गया।
2013 में शुरू की गई चीन की महत्वाकांक्षी सीपीईसी परियोजना शुरू से ही त्रुटिपूर्ण थी। हालांकि, इसके बावजूद इसे पाकिस्तान में रोजगार और विकास पैदा करने में सक्षम माना गया था।
चीन ने भी दिया था खास महत्व
चीन भी मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच मलक्का जलडमरू में मौजूदा गलियारे को दरकिनार करके सीपीईसी प्रोजेक्ट को खास महत्व देने लगा था। जब से सीपीईसी प्रोजेक्ट अस्तित्व आया, कुछ स्थानीय समूहों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है, जिससे प्रोजेक्ट में कामगारों की कमी होनी लगी।
लगातार हो रहे हैं टकराव
स्थानीय लोगों और चीनी कामगारों के बीच लगातार होने वाले टकराव को मीडिया में उजागर किया जाता रहा है। हालांकि, पाकिस्तान में चीनी कामगारों की सुरक्षा के लिए 10,000 का विशेष बल तैनात किया गया है, जबकि वहां स्थानीय लोग खौफ में जी रहे हैं।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

