बीजिंग:चीन एक बार से अपना रक्षा बजट बढ़ाने की तैयारी में है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा डिफेंस बजट होगा। वार्षिक संसद सत्र से पहले ‘जटिल सुरक्षा चुनौतियों’ का हवाला देते हुए बीजिंग ने यह जानकारी दी। चीन की रबर-स्टैंप संसद का एनुअल सेशन शनिवार को टॉप एडवाइजरी बॉडी चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (CPPCC) की उद्घाटन बैठक के साथ शुरू हुआ। वहीं, राष्ट्रीय विधायिका नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) का सत्र रविवार को शुरू होगा। मालूम हो कि इस सेशन में प्रधानमंत्री ली केचियांग का उत्तराधिकारी चुना जाना है।
एनपीसी सेशन से पहले उसके प्रवक्ता वांग चाओ ने रक्षा बजट में बढ़ोतरी का संकेत दिया। पिछले साल चीन का डिफेंस बजट 230 बिलियन अमेरिकी डॉलर था जो कि 7.1 फीसदी के इजाफे के बाद यहां तक पहुंचा। यह अमेरिका के रक्षा बजट 777.1 बिलियन यूएस डॉलर के बाद दूसरे नंबर पर था। वांग ने रक्षा बजट का अमाउंट तो नहीं बताया, हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि रविवार को इसका ऐलान हो जाएगा। प्रवक्ता ने चीनी डिफेंस खर्च में बढ़ोतरी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के हिस्से के रूप में चीन का रक्षा खर्च विश्व औसत से कम है।
वैश्विक प्रभाव को लेकर चीन अमेरिका के साथ होड़ करने में जुटा हुआ है। यह एक मुख्य वजह है जिसके कारण बीजिंग अपना रक्षा खर्च बढ़ा रहा है। चीन पिछले साल का रक्षा बजट भारत के लगभग 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर से तीन गुना अधिक था। वांग ने कहा कि चीन के सामने एक प्रमुख देश के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां निभाने में जटिल सुरक्षा चुनौतियां पेश आ रही हैं। उन्होंने कहा कि चीन का सैन्य आधुनिकीकरण किसी देश के लिए खतरा नहीं होगा, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता और विश्व शांति की रक्षा करने वाली सकारात्मक शक्ति होगी।
वांग ने अफ्रीका में चीन की ऋण जाल कूटनीति के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने विश्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बीजिंग अफ्रीका का सबसे बड़ा लेनदार नहीं है। शुक्रवार को ही सीपीपीसीसी के प्रवक्ता गुओ वेइमिन ने कहा था कि चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) से जुड़े ‘ऋण जाल’ के आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि बीजिंग इस पहल को आगे बढ़ने से नहीं रोकेगा। मालूम हो कि श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह जैसे चीनी निवेशों ने ऋण जाल के आरोपों को जन्म दिया। दरअसल, इसे कर्ज की अदला-बदली के हिस्से के रूप में हासिल किया था।
वहीं, रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनने की दावेदार निक्की हेली ने चीन को सबसे मजबूत शत्रु बताया है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका के सामने अब तक का सबसे मजबूत और अनुशासित दुश्मन साम्यवादी चीन है। उन्होंने हाल में जासूसी गुब्बारे वाली घटना का उल्लेख करते हुए कहा, ‘मैंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि अमेरिकी नागरिक आसमान में देखेंगे और पाएंगे कि चीन का एक खुफिया गुब्बारा हम पर नजर रख रहा है। यह राष्ट्रीय शर्मिंदगी की बात थी। हमें चीन को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता है।’













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