नई दिल्ली। मेडिकल सुविधाओं के विस्तार के बावजूद लोगों का इलाज का खर्च बढ़ता जा रहा है। रोचक बात यह है कि हॉस्पिटल में होने वाले इलाज की तुलना में बाहर होने वाले इलाज का खर्च दोगुने से भी ज्यादा है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण की एक ताजा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मेडिकल स्टोर से खरीदी जाने वाली दवाओं, लैब टेस्ट और क्लिनिक में डॉक्टर को दी जाने वाली फीस मरीजों की जेब पर भारी पड़ रही है।
पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति मासिक उपभोक्ता व्यय 3773 रुपये तथा शहरी क्षेत्रों में 6459 रुपये आंका गया है, लेकिन इस खर्च एक बड़ा हिस्सा लोगों को इलाज पर खर्च करना पड़ रहा है। उसमें हॉस्पिटल का खर्च और नॉन-हॉस्पिटल खर्च दो अलग-अलग मदें निर्धारित की गई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र में प्रति व्यक्ति हॉस्पिटल का खर्च 2.26 फीसद है। यानी करीब 85 रुपये वह हॉस्पिटल में भर्ती होने पर खर्च करता है, लेकिन हॉस्पिटल में भर्ती होने के इतर प्रति व्यक्ति चिकित्सा व्यय 4.77 फीसद यानी 180 रुपये है।
इसी प्रकार शहरी क्षेत्र के लोगों की बात करें तो उनके मासिक उपभोक्ता खर्च 6459 में 1.91 फीसद व्यय हॉस्पिटल में भर्ती होने पर होता है। यदि रुपये में बात करें तो वे करीब 123 रुपये इस मद में खर्च करते हैं। लेकिन यदि नॉन हॉस्पिटल खर्च की बात करें तो यह चार फीसद है जो करीब 258 रुपये होता है। शहरी हो या ग्रामीण लोग, उन्हें हॉस्पिटल से ज्यादा खर्च हॉस्पिटल के इतर होने वाले चिकित्सा सेवाओं पर खर्च करना पड़ता है।
छोटी बीमारी के लिए हॉस्पिटल नहीं: विशेषज्ञों के अनुसार, आमतौर पर मरीज छोटी बीमारियों के लिए हॉस्पिटल नहीं जाना चाहते हैं बल्कि हॉस्पिटल में गंभीर बीमारियों की स्थिति में भर्ती होते हैं। वहीं छोटी बीमारियों की इलाज के लिए लोग गैर क्लिनिक पर जाकर डॉक्टर का परामर्श लेते हैं। इसमें उन्हें डॉक्टर की फीस चुकानी होती है।
लैब में टेस्ट कराने होते हैं तथा मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। इस वजह से काफी ज्यादा पैसा खर्च हो जाता है। यह सर्वेक्षण यह भी दर्शाता है कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य तंत्र भी मजबूत नहीं है, जिसकी वजह से इस मामले में निर्भरता निजी चिकित्सकों की है।
बीमा कवर नहीं: सर्वे के मुताबिक, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को सब कुछ अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। हॉस्पिटल का खर्च कम होने की एक वजह यह भी है कि सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती होने पर खर्च न के बराबर होता है।
हॉस्पिटल से बाहर होने वाले खर्च आमतौर पर बीमा योजनाओं में भी कवर नहीं होते हैं। इसलिए गैर हॉस्पिटल खर्च को कम करने के लिए जरूरी है कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के सरकारी तंत्र को पूरे देश में मजबूत करने की जरूरत है।













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