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लोकतंत्र के खिलाफ है ‘एक देश एक चुनाव’, तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने किया विरोध

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
March 15, 2024
in मुख्य समाचार
Reading Time: 1 min read
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कब से लागू होगा ‘एक देश, एक चुनाव’ का नियम? द्रौपदी मुर्मू को सौंपी गई रिपोर्ट

नई दिल्ली:‘एक देश, एक चुनाव’ के मसले पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अगुवाई वाली उच्चस्तरीय समिति के समक्ष परामर्श के दौरान जहां देश के चार मुख्य न्यायाधीशों (सीजेआई) ने लोकसभा, विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव साथ कराए जाने का समर्थन किया था, वहीं हाईकोर्ट के तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने इसका विरोध किया था। हाईकोर्ट के तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने अपने परामर्श में समिति को बताया था कि देश में सभी चुनाव एक साथ कराने की अवधारणा लोकतंत्र के खिलाफ होगा। हालांकि, उच्च न्यायालयों के नौ पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा का समर्थन किया था।

उच्चस्तरीय समिति ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की है। उसके बाद 100 दिनों के भीतर नगरपालिका और पंचायत चुनाव कराने की बात कही है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों (जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे और जस्टिस यूयू ललित) ने इस मसले पर उच्चस्तरीय समिति को अपना लिखित परामर्श दिया था। देश के चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने सभी चुनाव एक साथ कराए जाने का समर्थन किया था।

विरोध में किसने क्या कहा
दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजीत प्रकाश शाह ने एक साथ चुनाव कराए जाने के विचार का विरोध करते हुए समिति के समक्ष कहा था कि इससे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति पर अंकुश लग सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस शाह ने यह भी कहा था कि एक साथ चुनाव राजनीतिक जवाबदेही में बाधा पहुंचाता है, क्योंकि निश्चित शर्तें प्रतिनिधियों को प्रदर्शन की जांच के बिना अनुचित स्थिरता प्रदान करती हैं। यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों को चुनौती देती हैं।

कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश गिरीश चंद्र गुप्ता ने भी एक साथ चुनाव कराने के विचारों का विरोध करते हुए समिति से कहा था कि यह लोकतंत्र के सिद्धांतों के विपरीत है।

मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी ने विरोध करते हुए कहा कि इससे भारत का संघीय ढांचा कमजोर होगा। उन्होंने कहा था कि देश में सभी चुनाव एक साथ कराने का विचार क्षेत्रीय मुद्दों के लिए नुकसानदायक होगा। उन्होंने भ्रष्टाचार और अक्षमता से निपटने के लिए अधिक प्रभावी सुधार के रूप में चुनावों के लिए राज्य वित्त पोषण का सुझाव दिया था।

ऐसे साथ होगा लोकसभा और विधानसभा का चुनाव
उच्चस्तरीय समिति ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव को एक साथ समकालिक बनाने के लिए संविधान में अनुच्छेद 82ए जोड़ने की सिफारिश की है। राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 24ए के प्रावधानों को लागू करने और तिथि तय किए जाने के बाद होने वाले आम चुनावों में गठित सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल, लोकसभा के पूर्ण कार्यकाल की समाप्ति के साथ ही खत्म हो जाएंगी। उदाहरण के लिए, यदि अनुच्छेद 24ए को जून 2024 में प्रभावी किया जाता है, तो लोकसभा के साथ-साथ सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल 2029 में समाप्त हो जाएगा।

तय तिथि के बाद और लोकसभा के पूर्ण कार्यकाल की समाप्ति से पहले राज्य विधानसभाओं के चुनावों द्वारा गठित सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल सिर्फ अगले आम चुनावों तक समाप्त होने वाली अवधि के लिए होगा। इसके बाद, लोकसभा और सभी राज्य विधान सभाओं के आम चुनाव एक साथ आयोजित किए जाएंगे।

समिति ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए इस रिपोर्ट की कार्यान्वयन पर ध्यान देने के लिए एक कार्यान्वयन समूह गठित करने की सिफारिश की है। अनिवार्य रूप से, अनुच्छेद 82ए (4) के अनुसार, यदि चुनाव आयोग की राय है कि आम चुनाव के समय किसी विधानसभा का चुनाव नहीं कराया जा सकता है, तो वह राष्ट्रपति को एक आदेश द्वारा उस विधानसभा के चुनाव की घोषणा करने की सिफारिश कर सकता है। विधानसभा बाद की तारीख में आयोजित की जा सकती है।

– समिति ने कहा है कि अनिवार्य रूप से, अनुच्छेद 82ए (4) के अनुसार, यदि चुनाव आयोग का यह मानना है कि आम चुनाव के समय किसी राज्य के विधानसभा का चुनाव नहीं कराया जा सकता है, तो वह एक आदेश द्वारा राष्ट्रपति को उस विधानसभा के बाद में चुनाव कराने की तारीख की घोषणा करने की सिफारिश कर सकता है।
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