हैदराबाद:तेलंगाना की राज्यपाल के रूप में तमिलिसाई सौंदरराजन का इस्तीफा सोमवार को उस समय सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के जगतियाल जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। वे तेलंगाना की राज्यपाल के अलावा, पुड्डुचेरी की उपराज्यपाल भी थीं। इस्तीफा देने के बाद तमिलिसाई ने कहा कि उन्होंने आक्रामक तरीके से लोगों की सेवा करने के लिए अपने पद से इस्तीफा दिया है।
अब उनके इस्तीफे की वजह भाजपा का एक इंटरनल सर्वे (आंतरिक सर्वेक्षण) बताया जा रहा है। हाल ही में भाजपा सदस्यों के बीच कराए गए सर्वे में ये बात सामने आई कि चुनावी राजनीति में तमिलिसाई की वापसी तमिलनाडु की तिरुनेलवेली, कन्याकुमारी और दक्षिण चेन्नई जैसी सीटों पर भाजपा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने नरेंद्र मोदी के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सलाह पर डॉक्टर तमिलिसाई को लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु से उतारने का फैसला किया। तमिलिसाई ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा और एक प्रति मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भेजी। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करने के बाद मोदी रविवार से तेलंगाना राजभवन में ठहरे हुए हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह आगामी लोकसभा चुनाव लड़ेंगी, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पहले मेरा इस्तीफा स्वीकार होने दीजिए और फिर मैं अपनी भविष्य की योजना के बारे में खुलासा करूंगी। उन्होंने कहा कि यह सच है कि मैंने लोगों की सीधे सेवा करने के लिए इस्तीफा दिया है। तमिलिसाई ने 2011 में वेलाचेरी और 2016 में विरुगमबक्कम से विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाई थीं। इसका अलावा उन्होंने 2019 में लोकसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन वहां भी हार का सामना करना पड़ा। 2019 के लोकसभा चुनावों में, तमिलिसाई तूतीकोरिन में डीएमके नेता कनिमोझी करुणानिधि से हार गईं थीं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेलंगाना सरकार द्वारा कुछ दिन पहले अपने प्रमुख सचिव सुरेंद्र मोहन को ट्रांसफर करने और उनकी जगह वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बुर्रा वेंकटेशम को नियुक्त करने के बाद तमिलिसाई का इस्तीफा तय हो गया था। आदर्श चुनाव संहिता के कारण राज्य सरकार द्वारा औपचारिक विदाई नहीं हो सकेगी। बता दें कि तमिलिसाई सौंदरराजन ने नवंबर 2019 में तेलंगाना राज्य के दूसरे राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी और फरवरी 2021 में उन्हें पुड्डुचेरी के उपराज्यपाल के रूप में अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। उनकी राजनीतिक वापसी की चर्चाएं पिछले साल से ही चल रही हैं।













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