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Home राज्य-शहर उत्तर प्रदेश

आगरा का यह धनकुबेर कौन: पलंग, आलमारी और जूतों के डिब्बों से निकल रहीं नोटों की गड्डियां

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
May 20, 2024
in उत्तर प्रदेश
Reading Time: 1 min read
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5 ट्रंक में रखे थे 17 करोड़ कैश, ईडी ने 16 घंटे में 8 मशीनों से की गिनती;

प्रतीकात्मक तस्वीर

आगरा:आयकर विभाग के सौ से अधिक अधिकारियों की टीमों के छापे में तीन जूता कारोबारियों के यहां से करीब 54 करोड़ रुपये की नकदी दो दिनों में बरामद हुई है। शनिवार दोपहर से जारी छापेमारी की कार्रवाई में मिली नोटों की गड्डियों को गिना जा रहा है। घर के अंदर पलंग, अलमारी, जूते के डिब्बे, थैलों, दीवारों से भी पांच सौ के नोटों की गड़्डिया निकलने से इनकम टैक्स अफसर भी हैरान हैं। हरमिलाप ट्रेडर्स के यहां सबसे ज्यादा नकदी मिली।

उसके यहां से 52 करोड़ रुपये के 500-500 के नोट बरामद हुए। वहीं मंशु फुटवियर कंपनी के संचालकों के यहां दो करोड़ रुपये की नकदी प्राप्त हुई। इस तरह कुल 54 करोड़ रुपये की नगदी को गिना जा सका है। यह नकदी सरकारी अभिरक्षा में बैंक में जमा की जाएगी। विभागीय टीम में आगरा एवं दूसरे जनपदों के अधिकारी एवं निरीक्षक शामिल रहे।

नोटों की गिनती शुरुआत में काफी धीमी रही। रविवार को सुबह तक दस से पन्द्रह फीसदी नोट ही गिने जा सके थे। उसके बाद स्टेट बैंक से अतिरिक्त मशीन और स्टाफ बुलाया गया। तब गिनती में तेजी आई। आयकर छापा रविवार को देर रात भी जारी रहा। टीमों का नेतृत्व संयुक्त निदेशक जांच डॉ. अमरजोत कर रहे हैं। सहयोग उप निदेशक पंकज कुमार एवं आशिमा महाजन सहित अन्य कर रहे हैं। बताया गया कि आय से अधिक संपत्तियों के अलावा बैनामी संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। टीमों को टैक्स में हेराफेरी के दस्तावेज भी हाथ लगे हैं, कई दस्तावेजों में ब्याज का हिसाब भी दर्ज मिला है।

जहां हाथ डाला वहां नगदी 
किसी व्यक्ति के यहां इतनी नगदी होगी, ऐसा आयकर टीम ने कल्पना भी नहीं की थी। विभागीय टीम जिस कमरे में प्रवेश करतीं, वहां नोटों के भंडार मिलने लगे। एक कमरे में काले चमड़े के बैग में नोट रखे थे। वहीं दूसरे कमरे में अटैची में नोट भरे हुए थे। एक कमरे में डबल बैड में भी नोट मिले। घर की अलमारियों से लेकर अन्य सुरक्षित स्थानों पर नोटों की गड्डियां मिलीं। लगभग सभी नोट पांच सौ के थे। हालात ऐसे हुए कि नोट गिनना ही मुश्किल हो गया।

पर्चियां खोलेंगी करोड़ों की कमाई के राज 
आयकर विभाग के आगरा कार्यालय की इंवेस्टीगेशन टीम की सर्च दूसरे दिन भी जारी रही। सर्च की शुरुआत में ही मिले नोटों के जखीरे को गिनने की कवायद रात और दिन चलती रही। देर रात को इस गिनती को संपन्न कराया गया। छानबीन के दौरान विभागीय अधिकारियों को करोड़ों की पर्ची मिली हैं। इनके आधार पर फर्मों की बाजार की देनदारी एवं वास्तविक टर्नओवर का पता चल सकेगा। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार इन पर्चियों का मूल्य 30 करोड़ रुपये से भी अधिक है।

बाजार के स्रोतों ने बताया कि फुटवियर में पर्ची सिस्टम पुराना चल रहा है। यह एक प्रकार का समानांतर चेक होता है जो कि कारोबारी द्वारा माल की प्राप्ति के एवज में दिया जाता है। इसमें भुगतान की अवधि लिखी होती है।

पर्ची का धारक इस को लेकर बाजार में जब घूमता है तो उसको दलालों के माध्यम से इन पर्चियों के खरीदार मिल जाते हैं। पर्ची जारी करने वाले की साख एवं पर्ची विक्रेता की जरूरत के अनुसार डिस्काउंट तय हो जाता है। जिस पर्ची का भुगतान 120 दिन बाद होना था, वह तुरंत मिल जाता है। जो व्यक्ति अधिक समय तक उधारी को सहन नहीं कर सकता, उसके लिए पर्ची को तय तिथि से पहले भुनाने का सिस्टम मुफीद रहता है।

ऐसे हालात में वह व्यक्ति अपने मुनाफे के एक हिस्से को छोड़ने को भी तैयार हो जाता है। वहीं दूसरी ओर इन पर्चियों में निवेश करने वाले को भी अपनी रकम पर अच्छा मुनाफा मिल जाता है। इस तरह बिना कारोबार किए ही यह लोग करोड़ों के वारे न्यारे कर लेते हैं। बताया जा रहा है कि इन इकाइयों द्वारा पर्चियों में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया। सर्च के दौरान जमीनों में निवेश के कागजात मिले हैं।

नई टीम बुलाई गई नोट गिनने को 
एआई से मिली सूचना के आधार पर आयकर विभाग की टीम ने शनिवार दोपहर एक बजे तीन जूता कारोबारियों के यहां एक साथ सर्च शुरू की। एमजी रोड पर मंशु फुटवियर, बीके शू कंपनी एवं हींग की मंडी में हरमिलाप ट्रेडर्स के प्रतिष्ठानों के साथ उनके निवास सहित कुल 14 स्थान पर यह कार्रवाई हुई। हरमिलाप ट्रेडर्स के निवास पर नोटों का बड़ा जखीरा मिला। आधा दर्जन बैगों में रखे इन नोटों की गिनती के लिए पहले जो मशीन मंगाई गई, उनकी गति बहुत धीमी रही। सुबह आठ बजे तक छह करोड़ रुपये ही गिने जा सके। बाद में दूसरी टीम बुलाई गई। इनके साथ दर्जन भर मशीन थी। इन मशीनों से गति आ गई और रात आठ बजे तक लगभग पूरा नकद गिन लिया गया।

गैर पंजीकृत व्यापारियों का हिसाब मांगा 
सूत्रों ने बताया कि सर्च में ऐसे अनेक कागजात मिले हैं जिनसे इकाइयों की अघोषित आय के बारे में पता चला है। इन इकाइयों की खरीद बिक्री का भी ब्योरा लिया जा रहा है। इनके द्वारा किए गए गैर पंजीकृत व्यापारियों के भुगतान को लेकर भी विभागीय टीम पूछताछ कर रही हैं। कार्रवाई के सोमवार तक चलने की उम्मीद की जा रही है। संयुक्त निदेशक जांच डॉ. अमरजोत के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई का नेतृत्व उप निदेशक जांच आशिमा महाजन एवं पंकज कुमार कर रहे हैं। आधा दर्जन जनपदों के 80 से अधिक आयकर अधिकारी एवं निरीक्षक शामिल हैं।

मंशु के यहां भी मिली नगदी 
आयकर विभाग की टीम को मंशु फुटवियर कंपनी के संचालकों के यहां भी बड़े पैमाने पर नोटों का भंडार मिला है। यह राशि करीब दो करोड़ रुपये बताई जा रही है। बीके शूज के यहां भी लाखों रुपये मिले हैं। विभाग द्वारा इस नगदी का स्रोत पूछा जा रहा है। जिसका अभी तक जवाब नहीं दिया गया है। यदि अभिलेखों में दर्ज राशि एवं इस नगदी का मिलान नहीं होता है तो इन कारोबारियों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। बड़ी राशि का टैक्स इन पर लगाया जा सकता है।

पहले भी हो चुकी कार्रवाई 
इनमें से एक इकाई पर दो बार आयकर विभाग का सर्वे हो चुका है। बताया जा रहा है कि छह साल और बारह साल पहले हुए सर्वे के बाद बड़ी राशि का टैक्स जमा कराया गया था। बीते साल ही इस कारोबारी के यहां जीएसटी का भी सर्वे हुआ था। इसमें भी काफी राशि बतौर टैक्स जमा करानी पड़ी थी। फिलहाल इस सर्च में विभाग को नगदी मिलना ही बड़ी सफलता प्रतीत हो रहा है। हालांकि कागजात भी मिले हैं, उनकी पड़ताल के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।

महिला पुलिस कर्मी परेशान 
आयकर सर्च में ड्यूटी ने एक महिला पुलिस कर्मी को परेशान कर दिया। उनके द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया गया। छोटा बच्चा होने का हवाला दिया गया। बताया कि किस तरह रात दिन दूरी होने से बच्चे का ध्यान रख पाना ही मुश्किल हो रहा है। उनकी सुनवाई करने के बाद राहत देने के लिए आश्वस्त किया गया। वहीं आयकर के सूत्रों ने बताया कि सर्च में कई बार तीन से चार दिन तक लग जाते हैं। कई बार इससे भी अधिक समय लग जाता है।

पर्चियों का गणित 
आयकर विभाग के अधिकारी सर्च के दौरान पर्चियों का गणित समझने में लगे हुए थे। यह बात चौंका रही कि किस तरह एक उधारकर्ता किसी अन्य को अपनी उधार ट्रांसफर करके इस सिस्टम से किस प्रकार बाहर हो सकता है। वहीं एमएसएमई के लिए लाया गया भुगतान का नियम भी इस कार्रवाई में अहम भूमिका निभा रहा है। सभी ने अपनी प्रविष्टियों को इंवाइस के अनुसार समायोजित करने के लिए तमाम प्रकार के प्रयास किए। इसमें भी काफी झोल मिले हैं।

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