वाशिंगटन : अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन एक बड़ा दावा करते हुए कोविड-19 की उत्पत्ति से जुड़े मुद्दे को फिर से अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि एक शीर्ष अमेरिकी वैज्ञानिक ने चीन की वुहान लैब को फंडिंग दी थी, जहां कोविड-19 से जुड़े शोध किए जाने की बात पहले भी सामने आती रही है।
गबार्ड के अनुसार, इस फंडिंग और शोध गतिविधियों को लेकर अमेरिकी प्रणाली में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वुहान स्थित प्रयोगशाला में किए गए शोधों, विशेषकर “गैन-ऑफ-फंक्शन” रिसर्च, की विस्तृत और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इस प्रकार के शोध में वायरस के व्यवहार और संक्रमण क्षमता को समझने के लिए उसमें बदलाव किए जाने की प्रक्रिया शामिल होती है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर अभी तक कई महत्वपूर्ण तथ्य पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे इस विषय पर संदेह और बहस बनी हुई है।
इस बयान के बाद अमेरिका में राजनीतिक और वैज्ञानिक हलकों में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं, जबकि कई विशेषज्ञ इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से जोड़कर देख रहे हैं।
गौरतलब है कि कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिक समुदाय अभी भी एकमत नहीं है। कुछ शोध इसे प्राकृतिक संक्रमण का परिणाम मानते हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ लैब लीक की संभावना को भी खारिज नहीं करते।
यह मुद्दा एक बार फिर वैश्विक स्तर पर महामारी की उत्पत्ति और उससे जुड़े शोध की निगरानी को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।













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