प्रधानमंत्री मोदी ने अगले डेढ़ साल में 10 लाख नौकरियों का ऐलान कर दिया है। इसके लिए मिशन मोड पर काम करने की ताकीद की गई है। बता दें कि इससे दो जून को प्रधानमंत्री कह चुके थे कि रोजगार पर सबसे ज्यादा फोकस होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रालयों और सरकारी विभागों में खाली पदों को भरने की भी बात कही थी। असल में पिछले काफी वक्त से देशभर में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा बनी हुई है। इसको लेकर कई जगहों पर प्रदर्शन भी हो चुके हैं। वहीं इस साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश और बिहार में रेलवे रिक्रूटमेंट में अनियमितताओं पर छात्रों और पुलिस में भिड़ंत हुई थी।
आंकड़ों में बेरोजगारी
आंकड़ों में भी बेरोजगारी की समस्या उभरकर आई है। अप्रैल 2020 में कोरोना की पहली लहर के दौरान भारत में यह आंकड़ा 23.5 फीसदी तक पहुंच गया था। हालांकि दिसंबर 2021 तक अनएंप्लॉयमेंट रेट घटकर 7.9 फीसदी तक आ गया था। हालांकि बेरोजगारी का आलम पूरी दुनिया में ही था, लेकिन भारत इस मामले में बांग्लादेश, मैक्सिको और विएतनाम तक से पीछे हो गया था। साल 2022 के फरवरी महीने में भारत में बेरोजगारी का आंकड़ा 8.1 फीसदी था। मार्च में यह 7.6 फीसदी पर आया, लेकिन अप्रैल में फिर बढ़कर 7.8 फीसदी पर पहुंच गया। वहीं 40 फीसदी भारतीय काम कर रहे थे या काम की तलाश में थे। वहीं वैश्विक औसत 60 फीसदी का था। आधिकारिक आंकड़ों के हिसाब से देखें तो एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी में एक करोड़ तीस लाख मिलियन लोग नौकरी की तलाश में हैं। जबकि इसकी तुलना में वैकेंसीज महज 220,000 ही हैं।
समस्या कहां पैदा हो रही है
कहने के लिए सरकार लोगों को रोजगार देने में सक्षम नहीं है। लेकिन इसके लिए कहीं न कहीं हालात भी जिम्मेदार हैं। असल में भारत में हर साल एक करोड़ बीस लाख लोग नौकरी पाने की उम्र में पहुंच जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ साल में कोरोना महामारी के चलते अर्थव्यवस्था इस हिसाब से विकसित नहीं हो पाई। वहीं नौकरियों की कमी के चलते भी कई समस्याएं पैदा हो रही हैं। इनमें से एक है सामान की मांग और खपत में कमी होना। इस कमी के चलते संपूर्ण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं इसके चलते नौकरियां भी प्रभावित हो रही हैं और खाना, शिक्षा और दवाओं पर भी असर पड़ रहा है।
कहां कितनी वैकेंसी?
इस साल की शुरुआत में केंद्रीय सरकार ने संसद में खाली पदों के बारे में जानकारी दी थी। इसके मुताबिक 1 मार्च 2020 को केंद्रीय सरकार के मंत्रालयों में 8.72 खाली पद थे। इसमें 2.5 लाख पद सिविल डिफेंस विभाग में, 2.3 लाख पद रेलवे में, 1.3 लाख पद गृह मंत्रालय में, 90,000 पोस्ट्स डिपार्टमेंट में और 74000 पद रेवेन्यू डिपार्टमेंट में थे। अब जबकि हम 2022 के मध्य में हैं, खाली पदों की यह संख्या 10 लाख तक पहुंच गई है, जिसके बारे में केंद्र सरकार बात कर रही है।
क्या इतनी नौकरियां पर्याप्त हैं?
अब सवाल उठता है कि क्या 10 लाख नौकरियां पर्याप्त होंगी? हो सकता है कि अगले 18 महीने में इन पदों पर भर्ती करके भाजपा 2024 के चुनाव में बढ़िया रिपोर्ट कार्ड पेश करे। लेकिन एक सच यह भी है कि इतनी नौकरियां पर्याप्त नहीं होंगी। ऐसे में सरकार को चाहिए कि चुनावों के दौरान किए गए वादों के मुताबिक अधिक से अधिक नौकरियां और रोजगार के मौके लोगों को मुहैया कराए। इसकी वजह यह है कि भारत में हर साल एक बड़ी आबादी नौकरी की तलाश में उभर रही है।













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