डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा युद्धविराम की संभावनाएं बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में नरमी देखने को मिली है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे भारत समेत तेल आयात करने वाले देशों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ते कदमों ने तेल आपूर्ति को लेकर बनी आशंकाओं को कम किया है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 78 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। हाल के दिनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था, लेकिन अब निवेशकों का भरोसा लौटने से बाजार में स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ती है और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सुचारु बनी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी आ सकती है। इसका सीधा लाभ भारत जैसे देशों को मिलेगा, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करते हैं।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल विपणन कंपनियां वैश्विक बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है।













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