डेस्क : भारत के निर्यात क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस अवधि में वस्तु और सेवा दोनों को मिलाकर कुल निर्यात पहली बार 860 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। यह लगातार वैश्विक व्यापार में भारत की मजबूत होती स्थिति और निर्यात क्षेत्र की स्थिर प्रगति को दर्शाता है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से मार्च 2025-26 के दौरान कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह 825.26 अरब डॉलर था। इस प्रकार इसमें 4.22 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है और यह अब तक का सर्वाधिक स्तर है।
वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) की बात करें तो इसमें भी वृद्धि देखने को मिली है, हालांकि गति अपेक्षाकृत धीमी रही। वित्त वर्ष 2025-26 में वस्तु निर्यात बढ़कर 441.78 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 437.70 अरब डॉलर था। यह 0.93 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
वित्त वर्ष के अंतिम महीने मार्च 2026 में निर्यात में तेज़ उछाल देखने को मिला, जब वस्तु निर्यात 38.92 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पूरे वर्ष का सबसे उच्च मासिक आंकड़ा रहा।
इस वृद्धि में पेट्रोलियम उत्पादों और इंजीनियरिंग वस्तुओं की अहम भूमिका रही। पेट्रोलियम उत्पादों को वैश्विक मांग और भारत की मजबूत रिफाइनिंग क्षमता से समर्थन मिला, जबकि इंजीनियरिंग क्षेत्र में मशीनरी, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और औद्योगिक उपकरणों की मांग बनी रही।
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि मार्च 2026 में निर्यात वृद्धि के प्रमुख चालक पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं, माइका, कोयला एवं अन्य अयस्क, प्रसंस्कृत खनिज, अन्य अनाज और हस्तशिल्प (हैंडमेड कालीन को छोड़कर) रहे।
विशेष रूप से खनिज क्षेत्र में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। माइका, कोयला और अन्य अयस्कों के साथ-साथ प्रसंस्कृत खनिजों का निर्यात 11.27 प्रतिशत बढ़कर 0.58 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 0.52 अरब डॉलर था। यह इस क्षेत्र में बढ़ती मूल्य संवर्धन क्षमता को भी दर्शाता है।
इसके अलावा अन्य अनाज और हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात ने भी वृद्धि में योगदान दिया, जिससे कृषि आधारित और पारंपरिक कारीगरी क्षेत्रों की मजबूती स्पष्ट होती है।
हालांकि सेवाओं का निर्यात कुल वृद्धि का प्रमुख आधार रहा, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वस्तु निर्यात ने सकारात्मक रुझान बनाए रखा। मार्च महीने की तेज़ वृद्धि यह संकेत देती है कि आपूर्ति श्रृंखला में सुधार हुआ है और वित्त वर्ष के अंत में निर्यात ऑर्डरों में मजबूती आई है।













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