डेस्क। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त ने गुरु दोषी और पंथ विरोधी घोषित कर दिया है। इसके पीछे सीएम का एक वायरल वीडियो है जिसमें वे कथित तौर पर सिखों की भावनाएं आहत करते हुए नजर आएं।
सिख धर्म की सबसे बड़ी और प्रभावशाली धार्मिक संस्था के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने सोमवार को इस फैसले का आधिकारिक एलान किया। इस फैसले में पूरे सिख समुदाय से भगवंत मान से संबंध तोड़ने के भी निर्देश जारी किए गए हैं। यह फैसला अलग-अलग सिख संगठनों के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया है।
बेअदबी विधेयक में संशोधन की मांग
दरअसल भगवंत मान ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026’ के कुछ नियमों को लेकर भी विरोध का सामना कर रहे हैं। मांग है कि विधेयक की बेअदबी के खिलाफ बनाए गए कानून में संशोधन किया जाए। अकाल तख्त सरकार के इस बेअदबी कानून को गलत ठहरा रहा है। अलग-अलग सिख संगठनऔर धार्मिक संस्थाएं भी इसका विरोध कर रही हैं।
मान ने वीडियो को बताया है फर्जी
सीएम वायरल वीडियो को एआई द्वारा छेड़छाड़ किया हुआ करार दे चुके हैं। वहीं एनडीवी के मुताबिक वीडियो फॉरेंसिंंक जांच में सही पाए गए हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से कहा गया है कि यह साबित नहीं हुआ है कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति सीएम भगवंत मान ही हैं।
वीडियो की करवाई गई फॉरेंसिक जांच
वहीं जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने बताया कि ‘हमने वीडियो को लेकर सीएम से सवाल किए थे जिसपर उन्होंने कहा था कि एआई के जरिए एडिट किए गए है। हमने उनसे सबूत पेश करने के लिए कहा था मगर 6 महीने बीते चुके हैं अबतक कोई जवाब नहीं आया है। हमने भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो फॉरेंसिक लैब से वीडियो की सत्यता की जांच करवाई जिसमें सामने आया कि वीडियो न तो फर्जी है और न ही एआई से बनाया गया है।’
29 जून को पेश होंगे विधायक मंत्री
‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026’ के विरोध के चलते उन सभी विधायकों और पंजाब सरकार में मंत्रियों को विधेयक पर हस्ताक्षर करने के वजह से 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है। इस विधेयक के कुछ आपत्तिजनक नियमों को हटाने को लेकर अकाल तख्त ने 15 दिनों की डेडलाइन भी दी थी। अकाल तख्त के इस एलान से पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है।













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