वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स समूह से जुड़ने वाले देशों को लेकर एक कड़ा और विवादास्पद बयान दिया है। रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने घोषणा की कि जो भी देश ब्रिक्स के “अमेरिका-विरोधी नीतियों” का समर्थन करेगा, उस पर अमेरिका 10% अतिरिक्त टैरिफ (शुल्क) लगाएगा।
“Any Country aligning themselves with the anti-American policies of BRICS will be charged an ADDITIONAL 10% Tariff. There will be no exceptions to this policy. Thank you for your attention to this matter!” ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा।
ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किन नीतियों को “अमेरिका-विरोधी” मानते हैं, और न ही यह बताया कि उनके इस बयान का इरादा किन विशेष देशों या नीतिगत घटनाओं की ओर है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब BRICS का वैश्विक प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन द्वारा गठित यह समूह 2010 में दक्षिण अफ्रीका को शामिल कर पांच सदस्यीय बना। बीते वर्ष इस समूह का विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया को सदस्यता दी गई।
ब्रिक्स अब एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में उभर रहा है जो पश्चिमी देशों द्वारा संचालित वैश्विक संस्थानों—जैसे G7 और नाटो—का विकल्प बनना चाहता है। यह समूह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, संयुक्त राष्ट्र में सुधार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता को कम करने जैसे मुद्दों को उठा रहा है। हालिया सम्मेलनों में BRICS देशों ने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और सैन्य हस्तक्षेपों की आलोचना भी की है।
ट्रंप का यह बयान आने वाले चुनावों के मद्देनज़र उनके विदेश और व्यापार नीति एजेंडे की झलक देता है। अपने पहले कार्यकाल (2017–2021) में ट्रंप ने चीन के साथ ट्रेड वॉर के दौरान बार-बार टैरिफ का उपयोग दबाव बनाने के लिए किया था। अब BRICS को लेकर उनकी यह नई चेतावनी यह दर्शाती है कि वे इस गठबंधन को न केवल आर्थिक चुनौती के रूप में देख रहे हैं, बल्कि एक भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी मानते हैं।
फिलहाल ब्रिक्स देशों की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के इस रुख से वैश्विक तनाव और ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है—खासतौर पर उन देशों के साथ, जो अमेरिका के रणनीतिक साझेदार भी हैं, जैसे भारत और सऊदी अरब।
यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप की यह घोषणा एक वास्तविक नीति प्रस्ताव है या 2024 की चुनावी रणनीति का हिस्सा, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि यह बयान अमेरिका और उभरती हुई वैश्विक शक्तियों के बीच टकराव की दिशा को दर्शाता है।













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