डेस्क :मध्य प्रदेश के चंदला से पूर्व विधायक रहे आरडी प्रजापति एक विवादित बयान को लेकर घिरते नजर आ रहे हैं। महिलाओं और देश के चर्चित कथावाचकों के संबंध में मंच से की गई उनकी आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बयान पर भाजपा और कांग्रेस—दोनों दलों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसकी निंदा की है।
भोपाल के कार्यक्रम में दिया बयान
रविवार को भोपाल में अनुसूचित जाति–जनजाति और पिछड़ा वर्ग से जुड़े संयुक्त मोर्चा सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के समर्थन का मुद्दा भी उठाया गया। इसी मंच से संबोधित करते हुए आरडी प्रजापति ने देश के कुछ कथावाचकों का नाम लेते हुए महिलाओं की गरिमा से जुड़ी अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उन्हें समाज में कथित रूप से गलत प्रवृत्तियों के लिए जिम्मेदार ठहराया।
प्रसिद्ध कथावाचकों पर टिप्पणी
अपने भाषण के दौरान आरडी प्रजापति ने अनिरुद्धाचार्य और जगद्गुरु रामभद्राचार्य सहित अन्य कथावाचकों को निशाना बनाया। उन्होंने कथावाचकों के कथित वक्तव्यों का उल्लेख करते हुए आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया, जिसे लेकर सामाजिक और धार्मिक संगठनों में रोष देखा जा रहा है।
कड़ी कार्रवाई की मांग
भाषण में आगे बढ़ते हुए आरडी प्रजापति ने कथावाचकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात कही। साथ ही आईएएस संतोष वर्मा को लेकर भी तीखी टिप्पणी की, जिसे राजनीतिक मर्यादाओं के विपरीत माना जा रहा है।
भाजपा का हमला
बयान सामने आने के बाद भाजपा ने इसे सनातन धर्मगुरुओं का अपमान बताया। भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि धार्मिक गुरुओं के खिलाफ इस तरह की भाषा निंदनीय है और कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों द्वारा सनातन पर हमला करना एक सोचा-समझा एजेंडा बनता जा रहा है।
कांग्रेस ने भी जताई आपत्ति
कांग्रेस ने भी इस बयान से खुद को अलग करते हुए इसकी आलोचना की। कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि राजनीति में ध्यान आकर्षित करने के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग एक खतरनाक चलन बनता जा रहा है। महिलाओं और धार्मिक कथावाचकों का अपमान किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
कौन हैं आरडी प्रजापति
आरडी प्रजापति वर्ष 2013 में चंदला विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। 2018 में टिकट न मिलने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर राजनीतिक वापसी की कोशिश की, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
फिलहाल, बयान को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है और सभी दल सार्वजनिक मंचों पर संयम और मर्यादा की मांग कर रहे हैं।













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