यरुशलम: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जब तक ईरान समर्थित हिजबुल्लाह से उत्पन्न सुरक्षा खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी।
दक्षिणी लेबनान में तैनात सैनिकों से मुलाकात के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह के सशस्त्र रहने और इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा बने रहने तक इजरायली सेना अपनी मौजूदगी बनाए रखेगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार नेतन्याहू ने कहा, “हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। जब तक खतरा समाप्त नहीं होता, हम दक्षिणी लेबनान नहीं छोड़ेंगे। जब तक हिजबुल्लाह हथियारों से लैस होकर हमारे लिए खतरा बना रहेगा, तब तक हमारी सेना यहां तैनात रहेगी।”
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पिछले सप्ताह अमेरिका की मध्यस्थता में लेबनान और इजरायल ने एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और हिजबुल्लाह को निरस्त्र करने की दिशा में कदम उठाना है।
समझौते के तहत इजरायल की वापसी को इस शर्त से जोड़ा गया है कि लेबनानी सरकार “पायलट ज़ोन” स्थापित कर वहां लेबनानी सेना की तैनाती सुनिश्चित करे और चरणबद्ध तरीके से हिजबुल्लाह को निरस्त्र करे।
नेतन्याहू ने ईरान और हिजबुल्लाह को संबोधित करते हुए कहा, “इस क्षेत्र को छोड़ दीजिए, अब आपका यहां कोई स्थान नहीं है। यहां दो संप्रभु राष्ट्र हैं जो शांति के साथ रहना चाहते हैं।”
मार्च में हिजबुल्लाह द्वारा उत्तरी इजरायल पर रॉकेट हमले किए जाने के बाद संघर्ष तेज हो गया था। इसके जवाब में इजरायल ने व्यापक हवाई हमले किए और दक्षिणी लेबनान में जमीनी सैन्य अभियान शुरू किया।
वर्तमान में इजरायली सेना सीमा से सटे लेबनानी क्षेत्र में लगभग 10 किलोमीटर अंदर तक फैले उस इलाके में तैनात है, जिसे इजरायल “सुरक्षा क्षेत्र” (सिक्योरिटी ज़ोन) के रूप में वर्णित करता है।
लेबनान के अधिकारियों के अनुसार, 2 मार्च से शुरू हुए संघर्ष में अब तक इजरायली हमलों में 4,200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, इजरायली सेना का कहना है कि इसी अवधि में उसके 38 सैनिकों और एक नागरिक ठेका कर्मचारी की मृत्यु हुई है।













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