डेस्क : आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद इन दिनों अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत वह लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं और भाजपा को छोड़ अन्य दलों के साथ गठबंधन के संकेत दे चुके हैं। इसी बीच उनके एक बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
लखनऊ और बाराबंकी में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान चंद्रशेखर आजाद ने तीखे अंदाज में कहा कि वे “चमड़ा उतारना, उसका जूता बनाना और समय आने पर उसी जूते से जवाब देना” जानते हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे करणी सेना की ओर से आई चुनौती का जवाब माना जा रहा है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब करणी सेना के प्रदेश महामंत्री अभिनव सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर चंद्रशेखर आजाद को बाराबंकी आने से रोकने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा था कि यदि आजाद वहां आते हैं तो उनके खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस बयान के बाद क्षेत्र में राजनीतिक तनाव बढ़ गया।
लखनऊ में दिया पहला जवाब
लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान चंद्रशेखर ने कहा कि वे संविधान में विश्वास रखने वाले लोग हैं, लेकिन इसे कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कानून का सम्मान करते हैं, मगर किसी से डरते नहीं हैं।
बाराबंकी में मंच से दोहराया बयान
बाराबंकी की सभा में भी उन्होंने अपने बयान को दोहराया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग खुलेआम गुंडागर्दी कर रहे हैं और उनके काफिले पर पत्थर फेंकने की कोशिश भी की गई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और संगठन दोनों मजबूत हैं और वे हर चुनौती का जवाब देना जानते हैं।
भारी सुरक्षा के बीच कार्यक्रम संपन्न
करणी सेना की चेतावनी के बाद बाराबंकी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अवध तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यह बयानबाजी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नई राजनीतिक रणनीति और ध्रुवीकरण का संकेत हो सकती है।













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