डेस्क : मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते गहराता वैश्विक ऊर्जा संकट अब भारत के पड़ोसी देशों पर स्पष्ट रूप से असर डालने लगा है। श्रीलंका और पाकिस्तान ने ईंधन की कमी से निपटने के लिए आपात कदम उठाए हैं।
श्रीलंका में चार दिन का कार्य सप्ताह लागू
श्रीलंका सरकार ने ईंधन बचाने के उद्देश्य से सरकारी कार्यालयों के लिए चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करने की घोषणा की है। इसके तहत एक अतिरिक्त साप्ताहिक अवकाश दिया गया है, जिससे आवागमन कम हो और ईंधन की खपत घटे।
सरकार ने ईंधन वितरण को सख्त किया है, राशनिंग व्यवस्था लागू की है और एलपीजी की कीमतों में भी वृद्धि की है।
गौरतलब है कि हाल ही में आर्थिक संकट से उबर रहा देश अब बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों और आपूर्ति बाधाओं के कारण फिर दबाव में आ गया है।
पाकिस्तान ने भी अपनाए सख्त कदम
पाकिस्तान ने भी ईंधन खपत कम करने के लिए चार दिन का कार्य सप्ताह लागू किया है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद कर ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की गई हैं ताकि परिवहन से होने वाली ईंधन खपत कम हो सके।
सरकार ने आधिकारिक वाहनों के उपयोग पर रोक लगाई है और सरकारी दफ्तरों में ऊर्जा उपयोग घटाने के निर्देश दिए हैं। आयातित ऊर्जा पर भारी निर्भरता के कारण पाकिस्तान वैश्विक आपूर्ति संकट से ज्यादा प्रभावित हो रहा है।
संकट की वजह क्या है?
मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण प्रमुख तेल आपूर्ति मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे कच्चे तेल और एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति बाधित हुई है।
इन समुद्री मार्गों से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल प्राप्त करता है, ऐसे में व्यवधान ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों को तेजी से बढ़ा दिया है।
भारत पर असर
भारत में भी इसका असर दिखने लगा है, खासकर एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला पर। हालांकि सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में वितरण में देरी की खबरें सामने आई हैं।
सरकार घरेलू उपभोग को प्राथमिकता दे रही है ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।













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