जयपुर : निर्माण नगर स्थित महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल के संबोधि सभागार में बुधवार को एक आध्यात्मिक एवं विचार-प्रधान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था — “सम्बन्ध : सांसारिक बनाम आध्यात्मिक”। इस अवसर पर मुनि श्री तत्व रुचि जी “तरुण” एवं मुनि श्री संभव कुमार जी ने जीवन, संबंधों और आत्मिक उन्नति पर गहन विचार प्रस्तुत किए।
मुनि श्री तत्व रुचि जी “तरुण” ने अपने उद्बोधन में कहा कि सांसारिक संबंध प्रायः स्वार्थ पर आधारित होते हैं, जहाँ छल, कपट और प्रवंचना जैसी प्रवृत्तियाँ भी देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने संबंधों को केवल बाहरी दुनिया तक सीमित न रखकर स्वयं के भीतर से जोड़ना चाहिए। आत्म-गुणों से जुड़ाव ही वास्तविक शुद्ध संबंधों की नींव है। ऐसे संबंध व्यक्ति को दगा और ठगी जैसी नकारात्मकताओं से बचाते हुए आत्म-विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं तथा जीवन में शांति और संतुलन स्थापित करते हैं।
उन्होंने आगे आत्मिक गुणों को पारिवारिक स्वरूप में प्रस्तुत करते हुए एक “आध्यात्मिक परिवार” की संकल्पना दी। उनके अनुसार धैर्य वह पिता है जो जीवन को संकटों से बचाने की शक्ति देता है। क्षमा को उन्होंने माता के रूप में वर्णित किया, जो सहनशीलता और करुणा का आधार है। शांति को ऐसी सहचरी बताया गया जो निरंतर साथ रहकर मन को तनावमुक्त रखती है। सत्य को पुत्र के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि यही जीवन का वास्तविक आधार और आत्मा का संरक्षण है। अहिंसा को भगिनी बताते हुए उन्होंने मैत्री और आत्म-तुल्यता की भावना को मजबूत करने वाली शक्ति बताया। संयम को सच्चा बंधु कहा गया जो हर परिस्थिति में मनुष्य का सहारा बनता है। इस प्रकार उन्होंने एक ऐसे आध्यात्मिक परिवार के निर्माण का संदेश दिया जो जीवन को संतुलित और सार्थक बनाता है।
कार्यक्रम में मुनि श्री संभव कुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज की दुनिया को मोबाइल की नहीं, बल्कि मुस्कान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चेहरे की वास्तविक प्रसन्नता मोबाइल स्क्रीन से नहीं, बल्कि आंतरिक आनंद और आत्मिक शांति से उत्पन्न होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आध्यात्मिकता आंतरिक आनंद की वह अवस्था है जो मनुष्य को वास्तविक सुख और संतोष प्रदान करती है।
कार्यक्रम का प्रारम्भ भगवान महावीर की स्तुति से किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं को जप एवं तप का भी लाभ प्राप्त हुआ। अंत में मंगल उच्चारण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।













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