डेस्क : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान में हाल ही में चलाए गए अमेरिकी बचाव अभियान (रेस्क्यू ऑपरेशन) से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक करने वाले पत्रकार को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार अपने स्रोत का नाम नहीं बताएंगे तो उन्हें जेल भी हो सकती है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस लीक के कारण मिशन जोखिम में पड़ा और एक अमेरिकी एयरमैन की जान खतरे में आ गई।
सरकारी अंदरूनी व्यक्ति ने की लीक
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सरकार के भीतर ही कोई “मोल” है जिसने ऑपरेशन की गोपनीय जानकारी मीडिया को दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पत्रकार ने अपने स्रोत का खुलासा नहीं किया, तो कानूनी कार्रवाई सहित जेल की कार्रवाई की जा सकती है। ट्रंप ने किसी विशेष पत्रकार या मीडिया हाउस का नाम नहीं लिया, लेकिन यह बताया कि लीक बेहद संवेदनशील थी।
ईरान रेस्क्यू ऑपरेशन का दायरा
ट्रंप ने बताया कि एफ‑15ई विमान के मार गिराए जाने के बाद चलाए गए बचाव अभियान में 155 विमानों का इस्तेमाल हुआ, जिनमें बमवर्षक, लड़ाकू विमान, रिफ्यूलिंग टैंकर और बचाव हेलीकॉप्टर शामिल थे। उन्होंने कहा कि रणनीतिक कदम उठाकर ईरानी सैनिकों को भ्रमित किया गया ताकि एयरमैन को सुरक्षित निकाला जा सके।
एयरमैन की बहादुरी और बचाव
ट्रंप ने घायल अमेरिकी एयरमैन की बहादुरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि एयरमैन ने पहाड़ों में अपने घावों का इलाज खुद किया और अमेरिकी बलों को अपनी लोकेशन बताई, जिससे उसे सुरक्षित निकाला गया। ट्रंप ने इस अभियान को “ऐतिहासिक” बताया और अमेरिकी बलों की तारीफ की।
प्रेस और प्रशासन के बीच तनाव
ट्रंप के इस बयान के बाद प्रशासन और मीडिया के बीच टकराव फिर उभरकर सामने आया है। ट्रंप का दावा है कि लीक के कारण ईरान को एयरमैन की स्थिति का पता चला और उसे पकड़ने पर इनाम देने की संभावना थी। उन्होंने कहा कि ऐसे लीक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।













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