ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर जारी खूनी दमन ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा के लिए ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है। हालांकि ट्रंप ने बातचीत का विकल्प पूरी तरह बंद नहीं किया है, खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक बेड़े (आर्मडा) की मौजूदगी एक गंभीर संदेश दे रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप का निर्णय करता है, तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—क्या रणनीति अपनाई जाए। इसके लिए तीन विकल्प सामने हैं:
1. ऊर्जा की नाकाबंदी: ‘वेनेजुएला मॉडल’
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका ईरान पर ‘वेनेजुएला मॉडल’ लागू कर सकता है। अमेरिकी विमानवाहक पोत और विध्वंसक ईरानी तेल टैंकरों को रोककर तेल निर्यात को बाधित कर सकते हैं। इसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को भीतर से कमजोर करना होगा।
2. IRGC और सैन्य ठिकानों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
अगर अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई करता है, तो इसका लक्ष्य ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और बसीज मिलिशिया होंगे। ये संगठन प्रदर्शनकारियों के कत्लेआम के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। टोमाहॉक मिसाइल और लड़ाकू विमानों के जरिए इनके कमांड सेंटरों को नष्ट किया जा सकता है, जिससे ईरान को सटीक और कड़ा संदेश जाएगा।
3. पूर्ण युद्ध और सत्ता परिवर्तन
सबसे चरम विकल्प ईरानी धर्मशास्त्रीय शासन को अस्थिर करना है। इसमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई, उनके सलाहकार और वरिष्ठ जनरलों को निशाना बनाना शामिल हो सकता है। कतर और यूएई में तैनात अमेरिकी लड़ाकू विमानों का इस ऑपरेशन में अहम योगदान हो सकता है।
वर्तमान परिदृश्य
वर्तमान में अमेरिका सीमित कार्रवाई की दिशा में झुका दिखता है। उद्देश्य ईरान के तंत्र को इतना कमजोर करना है कि वह जवाबी हमले की स्थिति में न रहे, लेकिन एक क्षेत्रीय युद्ध के खतरे से बचा जा सके। वहीं, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स दशकों से इस तरह की स्थितियों के लिए तैयार हैं, जिससे हर कदम जटिल और जोखिमपूर्ण बन जाता है।
आर्मडा क्या है?
आर्मडा (Armada) का अर्थ है युद्धपोतों का बड़ा बेड़ा या संगठित नौसैनिक समूह। यह शब्द स्पेनिश मूल का है और ऐतिहासिक रूप से 16वीं सदी में इंग्लैंड पर हमला करने वाले ‘स्पेनिश आर्मडा’ से जुड़ा है। आज भी जब कोई देश कई विमानवाहक पोत, विध्वंसक और सहायक जहाजों को एक साथ तैनात करता है, तो इसे आर्मडा कहा जाता है।
पूरी दुनिया की नजरें अब ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या वे कूटनीतिक रास्ता अपनाएंगे, या खाड़ी में तैनात अमेरिकी आर्मडा की मिसाइलें गरजेंगी?













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