नई दिल्ली: राजीव शुक्ला ने चार राज्यों—असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल—और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल जारी होने के एक दिन बाद संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 4 मई को होने वाली मतगणना तक किसी भी प्रकार की राजनीतिक अटकलों से बचना चाहिए।
एएनआई से बातचीत में शुक्ला ने कहा कि एग्जिट पोल कई बार वास्तविक परिणामों से अलग साबित हुए हैं। उन्होंने कहा, “हमें 4 मई तक इंतजार करना चाहिए। पहले भी एग्जिट पोल गलत साबित हुए हैं। कई बार एग्जिट पोल कुछ और बताते हैं और नतीजे कुछ और होते हैं। इसलिए किसी भी तरह की जल्दबाजी में राजनीतिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। मुझे पहले से ही उम्मीद है कि केरल में कांग्रेस जीत हासिल करेगी।”
बुधवार को जारी एग्जिट पोल के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए को असम में बढ़त मिलती दिखाई गई है, जबकि केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्ता में वापसी करता नजर आ रहा है। अधिकांश सर्वेक्षणों में पश्चिम बंगाल में भी भाजपा के पहली बार सरकार बनाने की संभावना जताई गई है।
केरल में एग्जिट पोल के मुताबिक यूडीएफ, सत्तारूढ़ एलडीएफ को सत्ता से बाहर कर सकता है, जिससे राज्य में 10 वर्षों का वामपंथी शासन समाप्त हो सकता है। विभिन्न एजेंसियों के सर्वेक्षणों में यूडीएफ को स्पष्ट बढ़त दिखाई गई है। ‘एक्सिस माय इंडिया’ के अनुसार, 140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ को 78 से 90 सीटें मिल सकती हैं, जबकि एलडीएफ को 49 से 62 सीटें और एनडीए को 0 से 3 सीटें मिलने का अनुमान है।
अन्य सर्वेक्षणों में भी यूडीएफ की बढ़त बरकरार है। ‘पीपुल्स पल्स’ ने यूडीएफ को 75-85 सीटें, एलडीएफ को 55-60 सीटें और एनडीए को 0-3 सीटें मिलने का अनुमान जताया है। वहीं ‘जेवीसी’ और ‘मैट्राइज’ के आंकड़े भी इसी दिशा में संकेत करते हैं, जहां यूडीएफ बहुमत के करीब या उससे ऊपर नजर आ रहा है।
गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनावों में एलडीएफ ने जीत दर्ज कर राज्य में हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा को तोड़ा था। पिछले चुनाव यूडीएफ के लिए झटका साबित हुए थे, ऐसे में मौजूदा एग्जिट पोल के अनुमान कांग्रेस गठबंधन के लिए राहत की खबर माने जा रहे हैं।
इन सभी राज्यों और पुडुचेरी में हुए चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान हुआ था, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले गए। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ। सभी राज्यों में इस बार मतदान प्रतिशत काफी अधिक दर्ज किया गया।













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