डेस्क : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक से इतर मंगलवार को किर्गिज़स्तान, कज़ाखस्तान और बेलारूस के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों का उद्देश्य रक्षा सहयोग को नई दिशा देना और क्षेत्रीय सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करना रहा।
किर्गिज़स्तान के रक्षा मंत्री के साथ हुई बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और विस्तार देने पर सहमति बनी। इस दौरान मानवीय सहायता, आपदा राहत तथा खोज एवं बचाव अभियानों में सहयोग को बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। भारत की ओर से किर्गिज़स्तान को दो स्वदेशी रूप से विकसित आपदा राहत एवं चिकित्सा सहायता उपकरण भी सौंपे गए।
इसके बाद कज़ाखस्तान के रक्षा मंत्री के साथ हुई बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने रक्षा संबंधों को दीर्घकालिक और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इसी क्रम में बेलारूस के रक्षा मंत्री के साथ भी द्विपक्षीय बातचीत हुई, जिसमें रक्षा सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी समन्वय को बढ़ाने पर सहमति बनी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये सभी बैठकें भारत की उस कूटनीतिक नीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत मध्य एशियाई देशों के साथ रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एससीओ जैसे मंच भारत को क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करते हैं।
इन बैठकों के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह न केवल पारंपरिक रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाना चाहता है, बल्कि तकनीक, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा समन्वय जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी को विस्तार देना चाहता है।













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