बागपत। आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश पर एक बार फिर सबकी नजर है। यहां हाल ही में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के रूप में एक नया साथी मिला है। रालोद भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पार्टी है। हालांकि 1977 (47 साल) के बाद पहली बार, चौधरी चरण सिंह परिवार का कोई भी सदस्य लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेगा। रालोद ने सोमवार को बागपत से राजकुमार सांगवान की उम्मीदवारी की घोषणा के साथ बता दिया कि चौधरी परिवार चुनावी मैदान में नहीं है। बागपत को पूर्व प्रधानमंत्री का पारिवारिक गढ़ माना जाता है लेकिन वर्तमान में यहां से भाजपा के सत्यपाल सिंह लोकसभा सांसद हैं। इसके अलावा राजकुमार सांगवान जाट बिरादरी के सबसे वरिष्ठ एवं प्रभावशाली नेताओं में शुमार किये जाते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों और गुर्जरों की खासी तादाद है, ऐसे में रालोद द्वारा इन दोनों बिरादरियों के उम्मीदवारों को उतारा जाना जातीय समीकरण साधने की कोशिश मानी जा सकती है।
बागवप के अलावा, रालोद ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बताया कि पार्टी ने बिजनौर लोकसभा सीट से चंदन चौहान को उम्मीदवार बनाया है। चंदन चौहान इस वक्त मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट से रालोद के विधायक भी हैं। चौहान गुर्जर समुदाय से आते हैं। उनके पिता संजय सिंह चौहान वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में बिजनौर से सांसद भी चुने गये थे। उनके दादा नारायण सिंह चौहान वर्ष 1979 में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं। रालोद द्वारा यह घोषणाएं पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी के गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के दो दिन बाद आई हैं। सूत्रों ने कहा कि शाह और नड्डा आरएलडी के लिए दो सीटें छोड़ने पर सहमत हुए थे।
गौरतलब है कि केंद्र की मोदी सरकार ने हाल ही में चौधरी चरण सिंह के लिए भारत रत्न देने की घोषणा की थी। इसके बाद से ही रालोद का झुकाव भाजपा के साथ गठबंधन के तौर पर देखा जाने लगा था। बाद में जयंत चौधरी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) से नाता तोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हो गए।
बागपत की बात करें तो यह चरण सिंह की कर्मभूमि है, जिन्होंने 1977 में पहली बार इस सीट से सफलतापूर्वक चुनाव लड़ा और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस की लहर के बावजूद 1980 और 1984 में लगातार जीत हासिल की। उनके बेटे अजीत सिंह को 1989 में यह सीट विरासत में मिली और उन्होंने 2009 तक छह बार इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
इसके अलावा रालोद ने विधान परिषद की एक सीट के लिए योगेश चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। इसके लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई है। योगेश चौधरी का चुनाव लगभग 6 वर्षों के बाद विधान परिषद में आरएलडी की वापसी का प्रतीक होगा। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 13 सदस्यों का कार्यकाल इसी साल मई में खत्म होने वाला है। इनमें भाजपा के 10 और अपना दल (सोनेलाल), समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का एक—एक सदस्य शामिल है।
हालांकि अभी राजग ने लोकसभा और विधान परिषद की सीटों के बंटवारे के बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा है। मगर चर्चा है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में अपने गठबंधन के सहयोगी दलों अपना दल (सोनेलाल), निषाद पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और रालोद के लिए कुल पांच सीटें छोड़ सकती है, बाकी 75 सीटों पर भाजपा अपने प्रत्याशी उतारेगी।












देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
