नई दिल्ली:इलेक्टोरल बॉन्ड के तहत किस कारोबारी घराने या शख्स ने किस दल को कितनी रकम दान की है। इसका भी खुलासा करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। इस बीच भाजपा ने नियम का हवाला देते हुए कहा है कि किसने किस दल को डोनेशन दी है, यह जानकारी देना ठीक नहीं होगा। वहीं छोटे दल अब इस तैयारी में जुटे हैं कि इसकी डिटेल दे दी जाए। इनमें से ही एक पार्टी डीएमके का कहना है कि वह उन डोनर्स से बात कर रही है, जिनसे उसे रकम मिली थी। पार्टी की ओर से उन लोगों से डिटेल मांगी जा रही है, जिन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए दान किा था। यह जानकारी जुटा लेने के बाद चुनाव आयोग को दी जाएगी और फिर वह वेबसाइट पर अपलोड करेगा।
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके ने चुनावी बॉन्ड्स के जरिए अप्रैल 2019 से नवंबर 2023 तक 656 करोड़ रुपये की रकम हासिल की थी। इसमें से 509 करोड़ रुपये की बड़ी रकम तो उसे अकेले फ्यूचर गेमिंग से ही मिल गई थी। इस बारे में चुनाव आयोग को एक लेटर लिखकर डीएमके ने जानकारी दी है। डीएमके ने बताया, ‘इस स्कीम के तहत डोनेटर का नाम उजागर करने की जरूरत नहीं है। फिर भी हमने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अपने डोनर्स से संपर्क साधा है और उनसे पूरी जानकारी लेने के बाद साझा किया जाएगा।’
इसी तरह कर्नाटक की पार्टी जेडीएस का भी कहना है कि वह उन लोगों की डिटेल जल्दी ही चुनाव आयोग को देगी, जिन्होंने उसे इलेक्टोरल बॉन्ड के तहत डोनेट किया है। लेकिन भाजपा का कहना है कि डोनेटर्स का नाम उजागर करना नियम के खिलाफ होगा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा ने चुनाव आयोग को बताया, ‘यह नियम के विपरीत होगा कि यह जानकारी दी जाए किसने कितना दान किस पार्टी को दिया है। हमारे पास यह जानकारी भी नहीं है।’ वहीं कांग्रेस ने तो इस मामले में एक कदम आगे बढ़ते हुए एसबीआई से ही कहा है कि वह चुनाव आयोग को उन लोगों या संस्थाओं की डिटेल दे दे, जिन्होंने उसे दान किया है।
इनके अलावा समाजवादी पार्टी, एआईएडीएमके, एनसीपी, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, जेडीयू, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट जैसे दलों ने चुनाव आयोग को बताया है कि उन्हें कितनी रकम किससे मिली है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एसबीआई ने इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा चुनाव आयोग को दिया है। इस डेटा को आयोग ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है, लेकिन इस बात को लेकर सवाल उठ रहा है कि आखिर यह जानकारी क्यों नहीं दी गई कि किस संस्था ने किस दल को कितनी रकम डोनेट की है।













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