डेस्क: देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज अब अपने सबसे चर्चित कॉरपोरेट कदम के बेहद नजदीक पहुंच चुकी है। जियो प्लेटफॉर्म्स का बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) जल्द ही शेयर बाजार में दस्तक दे सकता है। कंपनी इस समय सरकार की ओर से आईपीओ से जुड़े संशोधित नियमों की अंतिम अधिसूचना का इंतजार कर रही है। जैसे ही यह नोटिफिकेशन जारी होगा, रिलायंस जियो अपना डीआरएचपी (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) दाखिल करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर देगी। बाजार सूत्रों के मुताबिक, यह आईपीओ भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है, जिसके जरिए 4 से 4.5 अरब डॉलर, यानी लगभग 33,000 से 37,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने की संभावना है।
कंपनी ने क्या कहा
रिलायंस जियो की पोस्ट-अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस कॉल में कंपनी के स्ट्रैटेजी हेड अंशुमान ठाकुर ने साफ किया कि आईपीओ को लेकर आंतरिक तैयारियां पहले से चल रही हैं, लेकिन वास्तविक प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी जब नियामकीय स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने बताया कि कंपनी सेबी की सिफारिशों और दिशानिर्देशों के अनुरूप ही कदम उठा रही है। उनका कहना था कि हालात अनुकूल रहे तो आने वाले कुछ महीनों में जियो की लिस्टिंग संभव है। यदि ऐसा होता है, तो यह आईपीओ 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,000 करोड़ रुपये के आईपीओ को भी पीछे छोड़ देगा और भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ देगा।
क्या है पूरी डिटेल
इन्वेस्टमेंट बैंकों के आकलन के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन करीब 180 अरब डॉलर, यानी लगभग 15 लाख करोड़ रुपये मानी जा रही है। नए नियमों के तहत इतनी बड़ी कंपनी को आईपीओ में केवल 2.5 प्रतिशत शेयर बेचने की अनुमति होगी। इसी सीमित हिस्सेदारी की बिक्री से करीब 4.5 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं। सरकार पहले ही बड़े आईपीओ को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से न्यूनतम पब्लिक फ्लोट को 5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत करने को मंजूरी दे चुकी है, हालांकि इसका औपचारिक नोटिफिकेशन अभी आना बाकी है। इसके साथ ही, पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने की समय-सीमा भी बढ़ा दी गई है, जिससे जियो की लिस्टिंग के बाद बाजार में शेयरों की आपूर्ति का दबाव कम रहेगा।
शेयर बाजार में बन सकता है नया रिकॉर्ड
हालांकि जियो की लिस्टिंग के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी मानी जा रही हैं। जियो के सूचीबद्ध होने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज एक होल्डिंग कंपनी के रूप में देखी जाएगी, जिससे उसके वैल्यूएशन पर 5 से 20 प्रतिशत तक का डिस्काउंट लगने की आशंका जताई जा रही है। कई ब्रोकरेज हाउस पहले ही इस संभावित जोखिम को अपने आकलन में शामिल कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आईपीओ मुख्य रूप से फाइनेंशियल इन्वेस्टर्स के ऑफर फॉर सेल के जरिए आएगा, जबकि रिलायंस, मेटा और गूगल जैसे रणनीतिक निवेशक लंबे समय तक कंपनी के साथ बने रह सकते हैं। खुद मुकेश अंबानी संकेत दे चुके हैं कि 2026 की पहली छमाही में जियो का आईपीओ बाजार में उतर सकता है। 500 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर वाले जियो की लिस्टिंग भारतीय कैपिटल मार्केट में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकती है।













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