शिवाजी पार्क में दशहरा रैलियों में ही बाल ठाकरे ने बड़ी घोषणाएं कीं थीं। इसी रैली में बाल ठाकरे ने अपने पोते आदित्य ठाकरे को लेकर जनता से अपील की थी। उन्होंने अपने अंतिम दशहरा संबोधन में शिवसैनिकों से अपने संदेश में उद्धव और आदित्य का ख्याल रखने को कहा था। 24 अक्टूबर, 2012 को अपने अंतिम दशहरा संबोधन में, बाल ठाकरे ने कांग्रेस और राकांपा के खिलाफ आवाज उठाई और अपने बेटे और पोते के लिए समर्थन मांगा था। उन्होंने कहा था, “आपने मेरा ख्याल रखा। अब, उद्धव और आदित्य का ख्याल रखना।”
शिवसेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है शिवाजी पार्क?
जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने थे तब उनका शपथ ग्रहण समारोह मुंबई के मराठी बहुल दादर इलाके में 28 एकड़ के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क मैदान में ही हुआ था। शिवाजी पार्क शिवसेना का एक बेशकीमती गढ़ है। 1995 में भी, जब पूर्व शिवसेना-भाजपा गठबंधन ने पहली बार राज्य का चुनाव जीता था, तब भी इसी स्थान पर शिवसेना नेता मनोहर जोशी ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। पांच दशकों से अधिक समय से, मुंबई का शिवाजी पार्क वार्षिक दशहरा रैली के लिए शिवसेना का स्थल रहा है। जब बाल ठाकरे ने 1966 के दशहरे पर पार्क में अपनी पहली आधिकारिक रैली की, तो उसमें भारी भीड़ उमड़ी और एक परंपरा की शुरुआत हो गई। तब से हर साल शिवसेना ने दशहरा रैली शिवाजी पार्क में ही की है।
शिवसेना और उसकी दशहरा रैली
1966 में, बाल ठाकरे ने शिवसेना का गठन किया। इसी साल बाल ठाकरे ने शिवाजी पार्क में अपनी पहली रैली की थी। तब से वह हर साल दशहरा के दिन शिवाजी पार्क में रैली करते रहे। इस पार्क ने स्थानीय जनता के समर्थन को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसकी वजह यह भी रही क्योंकि दादर का यह इलाका मराठों का गढ़ है। तेजतर्रार नेता को देखने के लिए बड़ी भीड़ उमड़ती थी। इस दिन उनका भाषण महत्वपूर्ण हो जाता था क्योंकि यही भाषण पार्टी की आगे की दिशा तय करता था। इन वर्षों में, ठाकरे अन्य राजनीतिक हस्तियों को दशहरा रैली में शामिल करते रहे, जिनमें भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी और प्रमोद महाजन, समाजवादी जॉर्ज फर्नांडीस व शरद पवार शामिल हैं। 2010 में, जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई नगर निकाय को शिवाजी पार्क को साइलेंट जोन के रूप में अधिसूचित करने का निर्देश दिया, तो ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में आदेश पर जमकर निशाना साधा। हालांकि अदालत ने बाद में वार्षिक सभा की अनुमति दे दी थी।
पांच दशक से अधिक समय के बाद भी दशहरा रैली की परंपरा अभी भी जारी है। ठाकरे के पुत्र व उत्तराधिकारी उद्धव हर साल यहां रैली को संबोधित करते आ रहे हैं। शिवसेना मुख्यालय जिसे सेना भवन कहते हैं वह भी इसके पास में ही स्थित है। बाल ठाकरे कई वर्षों तक इसी पार्क के आसपास रहे। मनसे प्रमुख राज ठाकरे भी इसी इलाके के रहने वाले हैं। पार्क में बाल ठाकरे को समर्पित एक स्मृति स्थल है। यही नहीं, 2018 में बीएमसी ने मुंबई के मेयर बंगले को एक बड़ा स्मारक बनाने के लिए एक ट्रस्ट को सौंप दिया था।
बाल ठाकरे के पिता से जुड़ा है पार्क का इतिहास
इस जगह का इतिहास 1925 से शुरू होता है। 1925 में इसे माहिम पार्क के रूप में स्थापित किया गया था। लेकिन स्वतंत्रता सेनानी और तत्कालीन बीएमसी पार्षद अवंतिकाबाई गोखले के प्रयासों के कारण 1927 में इस खुली जगह का नाम बदलकर शिवाजी पार्क कर दिया गया। जनता के पैसों से यहां शिवाजी की एक प्रतिमा का भी निर्माण किया गया था। 1930 और 1940 के दशक में, इसी पार्क ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता रैलियों की मेजबानी की, और स्वतंत्रता के बाद संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन का भी गढ़ यही पार्क बना। आंदोलन के नेताओं में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के पिता समाज सुधारक केशव सीताराम उर्फ प्रबोधंकर ठाकरे थे।













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