नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद पार्टी ने एक बार फिर निर्वाचन आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शनिवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर राहुल गांधी ने शीर्ष नेताओं के साथ लगभग दो घंटे तक समीक्षा बैठक की और चुनाव परिणामों को लेकर गहन विचार-विमर्श किया।
बैठक में कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, कोषाध्यक्ष अजय माकन और बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू भी शामिल रहे। कांग्रेस ने इस बार बिहार में 61 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ छह सीटें ही हासिल कर पाई—जो वर्ष 2010 के बाद राज्य में पार्टी का दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन है। वर्ष 2020 में पार्टी ने 70 सीटों पर चुनाव लड़कर 19 सीटें जीती थीं और 9.6% वोट प्राप्त किए थे। इस बार एनडीए ने 202 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया है।
“दो हफ्ते में रखेंगे सबूत”
बैठक के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। लेकिन वेणुगोपाल ने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया “पूरी तरह संदिग्ध और अपारदर्शी” रही है। उन्होंने कहा कि परिणामों के पैटर्न को देखते हुए कई सवाल खड़े होते हैं और कांग्रेस इसकी जांच कर रही है।
“हम एक-दो हफ्ते में ठोस सबूत पेश करेंगे। पूरे बिहार से आंकड़े मंगवाए जा रहे हैं और विस्तृत विश्लेषण चल रहा है।”
“बिहार में भी लोग नतीजों पर भरोसा नहीं कर रहे”
वेणुगोपाल ने कहा कि एक राजनीतिक दल का 90% से ज्यादा का स्ट्राइक रेट भारतीय चुनाव इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया।
“यह सिर्फ कांग्रेस के लिए अविश्वसनीय नहीं है, बल्कि बिहार के लोग और हमारे गठबंधन सहयोगी भी इन नतीजों पर भरोसा नहीं कर पा रहे। हमने उनसे बातचीत की है और वही संकेत मिल रहे हैं।”
हरियाणा चुनाव में भी उठाए थे सवाल
वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि कांग्रेस पहले से ही निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाती रही है।
“हरियाणा चुनाव में भी हमने धांधली का मुद्दा उठाया था। आयोग की कार्यप्रणाली एकतरफा दिखाई देती है और उसमें पारदर्शिता का गंभीर अभाव है।”
कांग्रेस ने साफ किया है कि वह बिहार चुनाव परिणामों की गहराई से जांच करेगी और आरोपों के समर्थन में जल्द ही विस्तृत सबूत सार्वजनिक करेगी।













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