नई दिल्ली:दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखी है। इस खत के जरिए मांग की गई है कि दिल्ली की जेलों में बंद अंडर ट्रायल कैदियों को दूसरे राज्यों की जेलों में शिफ्ट किया जाए। दिल्ली सरकार की तरफ से कहा गया है कि अपराधियों के नेक्सस को तोड़ने और शहर के जेलों में सिस्टम को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि दिल्ली सरकार के गृह मंत्रालय की तरफ से लिखी गई इस चिट्ठी में यह भी कहा गया है कि इससे दिल्ली के जेलों की सुरक्षा-व्यवस्था को और भी पुख्ता किया जा सकेगा।
बता दें कि अप्रैल के महीने में तिहाड़ जेल में प्रिंस तेवतिया और मई के महीने में गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद अब दिल्ली सरकार ने यह कदम उठाया है। नाम ना बताने की शर्त पर दिल्ली सरकार के एक अफसर ने कहा, ‘केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा गया है और मांग की गई है कि अंडर ट्रायल कैदियों को अलग-अलग राज्यों की जेल में भेजा जाए। यह दिल्ली के जेलों में बंद अपराधियों के नेक्सस को तोड़ने और उनके क्राइम नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जरूरी है। कैदियों के ट्रांसफर से जेलों में गैंगवार भी रुकेगा और जेल ज्यादा सुरक्षित रह सकेगा।’
बता दें कि मौजूदा समय में अंडर ट्रायल कैदियों का दूसरे जेलों में ट्रांसफर सिर्फ कोर्ट के आदेश से ही किया जाता है या फिर केंद्र सरकार के निर्देश पर ऐसा किया जा सकता है। हालांकि, कुछ केसों में ऐसा कैदी की सुरक्षा को लेकर भी किया जाता है। तिहाड़ जेल के एक अफसर ने कहा कि जेल अथॉरिटी ने दिल्ली सरकार को अंडर ट्रायल कैदियों का ट्रांसफर दूसरे राज्यों में करने को लेकर लिखा था। यह कदम जेल में अपराधियों की सांठगांठ को खत्म करने के लिए लिया गया था।
दिल्ली सरकार के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पहले जम्मू और कश्मीर, उत्तर प्रदेश औऱ अन्य राज्यों के अंडर ट्रायल कैदियों को दिल्ली में शिफ्ट किया जा चुका है। जिन गैंगस्टरों की सुरक्षा को जेल के भीतर खतरा है और जिनकी पहचान कैदियों के बीच नेक्सस को लेकर है उन्हें बाहर शिफ्ट किया जाता है। उनके सहयोगियों को बाहर शिफ्ट किया जाता है ताकि इस नेक्सस को तोड़ा जा सके।
उपराज्यपाल की मंजूरी जरूरी
दिल्ली सरकार के अधिकारी ने कहा कि कैदियों के ट्रांसफर से जुड़े नियमों के मुताबिक, राज्य सरकार दूसरे राज्यों की सरकार से सहमति हासिल करने के बाद कैदियों का ट्रांसफर कर सकती है। दिल्ली के मामले में उपराज्यपाल के अप्रूवल की भी जरूरत होगी। प्रिजनर्स एक्ट, 1950 के तहत अंडर ट्रायल कैदियों के ट्रांसफर करने का नियम नहीं है। तिहाड़ जेल के एक अधिकारी ने कहा कि गृह मंत्रालय से सहमति मिलने और जरूरी बदलवा किये जाने के बाद अंडर ट्रायल कैदियों का ट्रांसफर किया जा सकता है।













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